Operation Sindoor Update: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान के ताजा बयान ने भारत-पाकिस्तान सैन्य घटनाक्रम पर नई चर्चा छेड़ दी है. उन्होंने कहा कि सैन्य कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान ने अपेक्षा से पहले युद्धविराम (सीजफायर) की इच्छा जताई थी, लेकिन भारत ने अपनी तय सैन्य रणनीति और लक्ष्यों को प्राथमिकता दी. उनके अनुसार, भारतीय सेना ने तत्काल युद्धविराम स्वीकार नहीं किया और योजनाबद्ध अभियान को आगे बढ़ाया.
क्या कहा पूर्व CDS ने?
एक कार्यक्रम के दौरान जनरल अनिल चौहान ने कहा कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के लिए कई चरणों में कार्रवाई की योजना बनाई थी. उनके अनुसार, पाकिस्तान की ओर से संपर्क उस समय हुआ जब भारत अपने निर्धारित लक्ष्यों का केवल एक हिस्सा ही पूरा कर पाया था. उन्होंने कहा कि भारत ने जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सैन्य स्थिति का आकलन किया और अपनी रणनीति के अनुरूप आगे बढ़ा.
ऑपरेशन सिंदूर क्यों शुरू किया गया था?
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था. भारत ने इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में मौजूद आतंकी ढ़ांचों को निशाना बनाने की बात कही थी. इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दिनों तक सैन्य तनाव बना रहा और ड्रोन, मिसाइल व सीमा पार गोलाबारी की घटनाएं सामने आईं.
युद्धविराम पर क्या है भारत का आधिकारिक रुख?
भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि युद्धविराम का निर्णय किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से नहीं, बल्कि दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सीधे संपर्क के बाद हुआ था. विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी कई अवसरों पर कह चुके हैं कि भारत की सैन्य कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने तनाव कम करने की इच्छा जताई थी और भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया.
बयान के राजनीतिक और रणनीतिक मायने
जनरल चौहान का यह बयान ऐसे समय आया है जब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर देश में लगातार चर्चा होती रही है. रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि यह बयान भारतीय सैन्य रणनीति के उस पक्ष को सामने लाता है, जिसमें किसी भी सैन्य अभियान के दौरान राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के बीच समन्वय व तय उद्देश्यों को प्राथमिकता दी जाती है. हालांकि, अभियान से जुड़े कई परिचालन (ऑपरेशनल) विवरण अब भी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं.
ताजा बयान से फिर चर्चा में आया ऑपरेशन सिंदूर
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कई पहलुओं पर समय-समय पर वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के बयान सामने आते रहे हैं. ताजा टिप्पणी के बाद एक बार फिर इस अभियान की रणनीति, युद्धविराम की परिस्थितियों और भारत की सैन्य नीति पर बहस तेज होने की संभावना है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में यदि सरकार या सशस्त्र बलों की ओर से अधिक आधिकारिक जानकारी साझा की जाती है, तो इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.
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