Nepal Flood 2026: नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया है, जिसकी भयावहता हर गुजरते दिन के साथ सामने आ रही है. 2 सितंबर 2026 तक मृतकों का आंकड़ा 1,000 के पार पहुंच चुका है, जबकि करीब 4,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं. राहत और बचाव दल मलबे, सुरंगों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं. आंकड़ों में लगातार बदलाव हो रहा है और कई इलाकों तक पहुंच अभी भी मुश्किल बनी हुई है.
1000 से ज्यादा शव बरामद, हजारों की तलाश
नेपाल के विदेश मंत्रालय के ताजा अपडेट के मुताबिक, अब तक 1,010 शव बरामद किए जा चुके हैं और लगभग 4,000 लोग अब भी लापता हैं. राहत व बचाव अभियान में नेपाल आर्मी, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 21,000 से अधिक जवान लगाए गए हैं. अधिकारियों के अनुसार 11,800 से ज्यादा लोगों को अब तक बचाया जा चुका है.
वहीं, 2 सितंबर की अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में नेपाल और तिब्बत को मिलाकर 1,066 मौतों और 4,462 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है. इस संयुक्त आंकड़े में नेपाल के साथ चीन के तिब्बत क्षेत्र में हुई मौतें और लापता लोग भी शामिल हैं.
ग्लेशियर ढ़हने के बाद आई विनाशकारी बाढ़
यह त्रासदी केवल सामान्य मानसूनी बारिश का नतीजा नहीं थी. 26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टानों के बड़े पैमाने पर खिसकने व ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद अचानक पानी का विशाल बहाव आया. इससे नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा और कई बस्तियां, सड़कें, पुल व जलविद्युत परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं.
हाइड्रोपावर सुरंगों में फंसे लोगों पर नजर
बचाव अभियान का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना है. कई परियोजनाएं बाढ़ और मलबे की चपेट में आई हैं. भारी मशीनों, हेलीकॉप्टरों और अस्थायी पुलों की मदद से बचाव दल दुर्गम इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं.
शवों की पहचान के लिए DNA जांच
बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान करना भी प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती बन गया है. कई शवों की स्थिति खराब होने के कारण नेपाल में परिजनों के DNA नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है, ताकि उनकी पहचान कर परिवारों को सौंपा जा सके.
राहत से पुनर्वास की ओर बढ़ता नेपाल
अब बचाव अभियान के साथ-साथ राहत और पुनर्वास पर भी जोर बढ़ रहा है. लाखों लोग इस आपदा से प्रभावित हुए हैं और कई इलाकों में सड़क, बिजली, संचार व पेयजल व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है. नेपाल सरकार के अनुसार करीब 16 लाख लोग इस बाढ़ से प्रभावित हुए हैं.
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती हजारों लापता लोगों का पता लगाना है. मलबे और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के बीच बचाव दल पूरी ताकत से अभियान चला रहे हैं, लेकिन समय बीतने के साथ जिंदा बचे लोगों को खोजने की उम्मीद लगातार कठिन होती जा रही है.
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