Bihar School Half Day Rule: बिहार के सरकारी स्कूलों में शनिवार को फिर से हाफ डे (आधे दिन) की व्यवस्था लागू कर दी गई है. शिक्षा विभाग के नए निर्णय के अनुसार, अब प्रत्येक शनिवार को टिफिन ब्रेक तक नियमित पढ़ाई होगी और इसके बाद विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी जाएगी. विभाग का कहना है कि इस बदलाव का उद्देश्य छात्रों पर पढ़ाई का अनावश्यक दबाव कम करना और सप्ताहांत में उन्हें अतिरिक्त समय उपलब्ध कराना है. यह व्यवस्था अगस्त 2026 से प्रभावी कर दी गई है.
पहले था यही नियम, फिर बदला गया और अब दोबारा शुरू
दरअसल, बिहार के सरकारी स्कूलों में पहले से ही शनिवार को हाफ डे की परंपरा लागू थी. उस समय छात्र आधे दिन की पढ़ाई के बाद घर लौट जाते थे. बाद में शिक्षा विभाग ने नई समय-सारिणी लागू करते हुए शनिवार को भी अन्य कार्यदिवसों की तरह पूरे समय तक विद्यालय संचालन का निर्णय लिया था. इस बदलाव के बाद छात्रों, अभिभावकों और कई शिक्षकों की ओर से पुराने सिस्टम को बहाल करने की मांग लगातार उठती रही. अब सरकार ने इन सुझावों और व्यावहारिक जरूरतों को देखते हुए एक बार फिर शनिवार को हाफ डे व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है.
नई व्यवस्था में क्या रहेगा?
नई समय-सारिणी के तहत सोमवार से शुक्रवार तक विद्यालय सामान्य समय के अनुसार संचालित होंगे, जबकि शनिवार को टिफिन ब्रेक तक शैक्षणिक गतिविधियां चलेंगी. इसके बाद विद्यार्थियों की छुट्टी कर दी जाएगी. वहीं शिक्षक विद्यालय में विभागीय निर्देशों के अनुसार आवश्यक प्रशासनिक कार्य, रिकॉर्ड अपडेट, बैठक या अन्य शैक्षणिक गतिविधियों का निष्पादन कर सकते हैं. इससे पढ़ाई और प्रशासनिक कार्यों के बीच बेहतर संतुलन बनाने की कोशिश की गई है.
छात्रों और अभिभावकों ने जताई खुशी
शनिवार को हाफ डे की व्यवस्था बहाल होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र और अभिभावक इसे राहतभरा फैसला मान रहे हैं. उनका कहना है कि सप्ताह के अंत में आधे दिन की पढ़ाई से बच्चों को आराम, स्वाध्याय, खेलकूद और सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों के लिए पर्याप्त समय मिलेगा. शिक्षकों का भी मानना है कि इससे विद्यालयों में कार्यों का बेहतर प्रबंधन किया जा सकेगा.
शिक्षा विभाग का उद्देश्य
शिक्षा विभाग का कहना है कि समय-समय पर स्कूल संचालन व्यवस्था की समीक्षा की जाती है. इसी क्रम में पुराने अनुभवों और वर्तमान आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए शनिवार को हाफ डे व्यवस्था फिर से लागू की गई है. सरकार का लक्ष्य है कि छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुए बिना उन्हें संतुलित शैक्षणिक वातावरण मिले और विद्यालयों में प्रशासनिक कार्य भी व्यवस्थित ढ़ंग से पूरे किए जा सकें.
यह भी पढ़ें- FCRA Bill 2026: विदेशी फंडिंग पर नए नियमों को लेकर क्यों मचा है विवाद? सरकार और विपक्ष आमने-सामने




