One Nation One Election: देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की बहस अब एक नए मोड़ पर पहुंचती दिख रही है. पहले ‘एक देश, एक चुनाव’ को 2034 के आसपास लागू करने की संभावना बताई जा रही थी, लेकिन अब इसे 2029 के लोकसभा चुनाव के साथ लागू करने की दिशा में राजनीतिक और संसदीय स्तर पर कवायद तेज होने की खबर है. हालांकि, 23 अगस्त 2026 तक यह फैसला लागू नहीं हुआ है और 2029 की समयसीमा भी अभी अंतिम रूप से तय नहीं है.
2034 की जगह 2029 पर क्यों जोर?
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, एनडीए 2029 में लोकसभा चुनाव के साथ 22 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में विधानसभा चुनाव कराने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है. इनमें वे राज्य भी शामिल हैं जहां एनडीए की सरकार है और जिनकी विधानसभा का कार्यकाल 2029 से पहले समाप्त होना है. इसके लिए कुछ विधानसभाओं को उनका मौजूदा कार्यकाल पूरा होने से पहले भंग करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किए जाने की बात सामने आई है.
यही वजह है कि ‘एक देश, एक चुनाव’ को 2034 तक टालने के बजाय 2029 से शुरू करने की संभावना चर्चा में आ गई है. लेकिन यह अभी रिपोर्टों और संभावित रणनीति का हिस्सा है, कोई अंतिम सरकारी घोषणा नहीं.
JPC की रिपोर्ट पर टिकी बड़ी तस्वीर
‘एक देश, एक चुनाव’ से जुड़े संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC कर रही है. समिति का कार्यकाल बढ़ाकर 2026 के शीतकालीन सत्र के अंतिम सप्ताह के पहले दिन तक कर दिया गया है.
JPC अलग-अलग राज्यों में जाकर राजनीतिक दलों, मुख्यमंत्रियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से राय ले रही है. जुलाई में गोवा में हुई चर्चा में भी चुनावी प्रक्रिया, संघवाद, समय से पहले विधानसभा भंग होने और कार्यकाल को लेकर कई संवैधानिक सवालों पर विचार हुआ.
क्या 2029 में पूरे देश में एक साथ चुनाव होंगे?
फिलहाल ऐसा कहना जल्दबाजी होगी. प्रस्ताव का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनावों को एक साथ कराना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पूरे देश में मतदान एक ही दिन होगा. JPC अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के मुताबिक, चुनाव जरूरत के अनुसार अलग-अलग चरणों में कराए जा सकते हैं.
विपक्ष के सामने भी बड़ी आपत्तियां
समर्थकों का तर्क है कि बार-बार चुनाव होने से सरकारी मशीनरी, सुरक्षा बलों और प्रशासन पर दबाव पड़ता है व चुनावी खर्च भी बढ़ता है. वहीं विरोध करने वाले दलों की चिंता है कि इससे राज्यों की राजनीतिक स्वायत्तता और संघीय ढ़ांचे पर असर पड़ सकता है. यही कारण है कि प्रस्ताव को लागू करने से पहले संवैधानिक और राजनीतिक सहमति बेहद महत्वपूर्ण होगी.
23 अगस्त 2026 तक ‘एक देश, एक चुनाव’ को 2029 से लागू करने की दिशा में चर्चा जरूर तेज हुई है, लेकिन इसे तय और लागू व्यवस्था मानना सही नहीं होगा. अब सबसे अहम पड़ाव JPC की रिपोर्ट और उसके बाद संसद में विधेयक की प्रक्रिया होगी.
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