Rajpal Yadav Cheque Bounce Case: बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों में सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर राहत तो मिली, लेकिन अदालत ने इस दौरान उनके पिछले आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई. 15 सितंबर 2026 की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बकाया रकम चुकाने के लिए आखिरी मौका देने का संकेत दिया. अदालत ने कहा कि कोर्ट के सामने दिए गए आश्वासनों का पालन होना चाहिए और महज समय मांगने से मामला आगे नहीं बढ़ सकता.
‘ड्रामा करने में माहिर हैं, लेकिन यह कोर्ट है’
सुनवाई के दौरान पीठ ने राजपाल यादव के अभिनेता होने का संदर्भ लेते हुए तीखी टिप्पणी की. रिपोर्टों के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि वह ड्रामा करने में माहिर हैं, लेकिन यह कोर्ट है. अदालत ने यह भी कहा कि उनके पिछले आचरण से भरोसा पैदा नहीं होता. हालांकि, कोर्ट ने उन्हें एक और अवसर दिया, ताकि वह भुगतान को लेकर ठोस प्रस्ताव सामने रख सकें.
यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि मामले में पहले भी राजपाल यादव की ओर से भुगतान को लेकर अदालत के समक्ष आश्वासन दिए गए थे, लेकिन भुगतान की शर्तों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इसी तरह के बार-बार किए गए वादों और उनके उल्लंघन को ध्यान में रखा था.
क्या है चेक बाउंस मामला?
यह विवाद फिल्म ‘अता पता लापता’ से जुड़े वित्तीय लेन-देन से संबंधित है. शिकायतकर्ता मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा राजपाल यादव और उनकी फिल्म कंपनी से जुड़े सात चेक बाउंस मामलों में कार्रवाई शुरू हुई थी. दिल्ली हाईकोर्ट ने जुलाई 2026 में राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए सातों मामलों में तीन महीने की साधारण कैद की सजा को कायम रखा था.
दो हफ्ते की मोहलत, 2 करोड़ का इंतजाम जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने एक्टर राजपाल यादव को दो हफ्ते के भीतर कम से कम 2 करोड़ रुपए जमा करने का आखिरी मौका दिया है. सुनवाई के दौरान राजपाल यादव के वकील ने बेंच को भरोसा दिलाया कि वह तय समय सीमा के भीतर 2 करोड़ रुपए जमा करेंगे और बाकी बकाया रकम के लिए श्योरिटी देंगे. उनकी सरेंडर से मिली राहत को भी 5 अक्टूबर 2026 तक बढ़ाया गया है और पासपोर्ट सरेंडर करने का निर्देश भी रिपोर्टों में आया है.
आगे क्या होगा?
अब राजपाल यादव को अदालत के निर्देशों के मुताबिक भुगतान और प्रस्ताव से संबंधित शर्तों का पालन करना होगा. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि बार-बार आश्वासन देने के बजाय वास्तविक अनुपालन जरूरी है. इसलिए अगली कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि अभिनेता अदालत द्वारा दिए गए इस अंतिम अवसर का किस तरह पालन करते हैं.
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