Deepfake Video Call Scam: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर ठगी के तरीके भी बदल रहे हैं. अब जालसाज नकली वीडियो, बदली हुई आवाज और किसी व्यक्ति की डिजिटल पहचान का गलत इस्तेमाल करके लोगों को गुमराह करने की कोशिश कर सकते हैं. डीपफेक तकनीक की मदद से तैयार किए गए वीडियो कॉल या आवाज वाले संदेशों के जरिए लोगों से पैसे ट्रांसफर करने, गोपनीय जानकारी साझा करने या तत्काल निर्णय लेने का दबाव बनाया जा सकता है.
वीडियो कॉल पर किसी परिचित का चेहरा या आवाज दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि कॉल करने वाला व्यक्ति वास्तव में वही है. ऐसे में सावधानी बरतना और किसी भी वित्तीय अनुरोध को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना जरूरी है.
डीपफेक फ्रॉड क्या है और ठग कैसे करते हैं इस्तेमाल?
डीपफेक एक ऐसी तकनीक है जिसमें AI की मदद से किसी व्यक्ति के चेहरे, आवाज या वीडियो में बदलाव करके वास्तविक जैसा दिखने वाला नकली कंटेंट तैयार किया जा सकता है. साइबर अपराधी इसका इस्तेमाल पहचान की नकल करने, भरोसा जीतने और पीड़ित से पैसे या संवेदनशील जानकारी हासिल करने के लिए कर सकते हैं. हालिया साइबर सिक्योरिटी रिपोर्टों में AI आधारित आवाज की नकल और डीपफेक से जुड़े धोखाधड़ी के जोखिम को लेकर चेतावनी दी गई है.
वीडियो कॉल पर कैसे हो सकती है ठगी?
मान लीजिए किसी व्यक्ति को उसके परिचित, अधिकारी या किसी कंपनी के प्रतिनिधि के नाम से वीडियो कॉल आती है. कॉल करने वाला तत्काल पैसे भेजने, OTP बताने या किसी बैंकिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दबाव बना सकता है. कुछ मामलों में ठग वीडियो और आवाज के जरिए भरोसा पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं.
हालांकि, हर संदिग्ध वीडियो कॉल डीपफेक नहीं होती और केवल वीडियो देखकर यह निश्चित नहीं किया जा सकता कि वह नकली है. इसलिए पहचान की पुष्टि के लिए अलग माध्यम का इस्तेमाल करना जरूरी है. भारतीय साइबर ठगी के मामलों में फर्जी अधिकारियों और वीडियो कॉल के जरिए डर पैदा करने वाले तरीकों की भी रिपोर्टिंग हुई है.
असली और नकली वीडियो कॉल की पहचान कैसे करें?
1. चेहरे और होंठों की गतिविधि देखें
आवाज और होंठों की गति में असामान्य अंतर, चेहरे के किनारों पर गड़बड़ी या अचानक दृश्य बदलाव संदेह पैदा कर सकते हैं. लेकिन ये संकेत अकेले डीपफेक का प्रमाण नहीं हैं.
2. आवाज को ध्यान से सुनें
आवाज में असामान्य उतार-चढ़ाव, रोबोट जैसी ध्वनि या बोलने के तरीके में बदलाव पर ध्यान दें. AI से बनाई गई आवाज हमेशा आसानी से पहचानी नहीं जा सकती.
3. दूसरे नंबर से सत्यापन करें
यदि कोई परिचित पैसे मांगता है, तो उसी कॉल पर भरोसा करने के बजाय उसके पहले से सेव किए गए नंबर पर खुद फोन करें. परिवार के लिए एक गुप्त सत्यापन शब्द भी तय कर सकते हैं.
4. तत्काल भुगतान से बचें
डर, धमकी या जल्दबाजी में पैसे भेजने के लिए कहा जाए, तो कॉल समाप्त करके स्वतंत्र रूप से जानकारी की पुष्टि करें.
AI डीपफेक से बचने के लिए जरूरी सावधानियां
किसी अनजान व्यक्ति के साथ वीडियो कॉल पर निजी दस्तावेज, बैंकिंग जानकारी, OTP, पासवर्ड या स्क्रीन शेयर न करें. सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा करते समय प्राइवेसी सेटिंग्स की समीक्षा करें. यह भी ध्यान रखें कि किसी व्यक्ति की सार्वजनिक तस्वीर या आवाज उपलब्ध होने से उसका इस्तेमाल करने वाले हर वीडियो की सत्यता साबित नहीं होती.
ठगी होने पर तुरंत क्या करें?
अगर डीपफेक या किसी अन्य साइबर ठगी के कारण पैसे चले गए हैं, तो तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता से संपर्क करें. भारत में वित्तीय साइबर फ्रॉड की शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन और cybercrime.gov.in का इस्तेमाल किया जा सकता है. स्क्रीनशॉट, कॉल डिटेल, लेनदेन की जानकारी और संदिग्ध प्रोफाइल जैसे सबूत सुरक्षित रखें.
शक हो तो तुरंत उठाएं ये जरूरी कदम
AI तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ डिजिटल पहचान की सुरक्षा और जानकारी का सत्यापन पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. वीडियो कॉल पर दिखने वाला चेहरा या सुनाई देने वाली आवाज भरोसे का एकमात्र आधार नहीं होना चाहिए. किसी भी वित्तीय अनुरोध की स्वतंत्र पुष्टि करें और संदिग्ध गतिविधि होने पर तुरंत संबंधित बैंक व साइबर अपराध अधिकारियों से संपर्क करें.
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