Heatwave Alert: देश के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है और मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में तेज हीटवेव की चेतावनी दी है. अप्रैल के अंत से ही जिस तरह की गर्मी देखने को मिल रही है, उसने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार गर्मी सामान्य से अधिक तीव्र हो सकती है, जिसका सीधा असर सबसे कमजोर वर्ग- बच्चों और बुजुर्गों पर पड़ेगा.
क्यों सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं ये वर्ग?
डॉक्टरों के अनुसार, बच्चों और बुजुर्गों का शरीर बाहरी तापमान के अनुसार खुद को जल्दी ढ़ाल नहीं पाता. बच्चों में शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है, लेकिन उन्हें प्यास या थकान का एहसास समय पर नहीं होता, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ जाता है. वहीं बुजुर्गों में पहले से मौजूद बीमारियां जैसे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी या सांस से जुड़ी समस्याएं गर्मी के असर को और गंभीर बना देती हैं. यही कारण है कि हीटवेव के दौरान इन दोनों वर्गों में हीट स्ट्रोक और कमजोरी के मामले सबसे ज्यादा सामने आते हैं.
देशभर में बढ़ते मामले और स्वास्थ्य पर असर
हाल के दिनों में कई शहरों में तापमान 41 से 43 डिग्री के बीच दर्ज किया गया है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है. अस्पतालों में उल्टी, चक्कर, तेज बुखार और बेहोशी जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है. डॉक्टरों का कहना है कि इन मामलों में बड़ी संख्या बच्चों और बुजुर्गों की है. सरकार ने भी स्थिति को गंभीर मानते हुए हीट एक्शन प्लान लागू किया है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की है.
हीटवेव से होने वाली बीमारियां
हीटवेव के दौरान कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं सामने आती हैं, जिनमें सबसे खतरनाक हीट स्ट्रोक होता है. इसके अलावा, शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, त्वचा का जलना (सनबर्न) और दिल या सांस से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ती हैं. यदि समय पर इलाज न मिले तो ये समस्याएं जानलेवा भी साबित हो सकती हैं.
बचाव के आसान और जरूरी उपाय
विशेषज्ञों का मानना है कि थोड़ी सावधानी बरतकर हीटवेव के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसके लिए जरूरी है कि लोग दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ जैसे नींबू पानी, छाछ या ORS का सेवन करें, ताकि शरीर हाइड्रेट बना रहे. दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने से बचना चाहिए, क्योंकि इस दौरान धूप सबसे ज्यादा तेज होती है. हल्के रंग के ढ़ीले और सूती कपड़े पहनने से शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलती है.
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है. उन्हें अकेला न छोड़ें और समय-समय पर पानी पिलाते रहें. घर के अंदर ठंडा माहौल बनाए रखने के लिए पंखा, कूलर या उचित वेंटिलेशन का इस्तेमाल करना चाहिए. यदि किसी को चक्कर, तेज बुखार, अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
सरकार और विशेषज्ञों की सलाह
स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि हीटवेव को हल्के में न लें और जारी दिशानिर्देशों का पालन करें. कई राज्यों में अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और हीट स्ट्रोक के इलाज के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जा रही हैं. साथ ही जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें.
हीटवेव बना बड़ा स्वास्थ्य संकट
कुल मिलाकर, हीटवेव अब एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही है. बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा और भी अधिक है, इसलिए सावधानी, जागरूकता और समय पर इलाज ही इससे बचने का सबसे प्रभावी तरीका है.
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