FSSAI Action: सोशल मीडिया पर किसी खाद्य या न्यूट्रिशन प्रोडक्ट को प्रमोट करना अब सिर्फ विज्ञापन की डील तक सीमित नहीं रहेगा. भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने सेलिब्रिटीज और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स को खाद्य उत्पादों से जुड़े बिना पुष्टि वाले हेल्थ और न्यूट्रिशन दावों को बढ़ावा देने को लेकर चेतावनी दी है. यह कदम ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर “इम्युनिटी बढ़ाने”, “पोषक तत्वों से भरपूर” और दूसरे स्वास्थ्य संबंधी दावे तेजी से प्रचारित किए जाते हैं.
बिना जांचे दावे किए तो बढ़ सकती है मुश्किल
FSSAI का रुख साफ है कि किसी खाद्य उत्पाद के विज्ञापन में किए जाने वाले दावे सच्चे, स्पष्ट, अर्थपूर्ण और गैर-भ्रामक होने चाहिए. खाद्य विज्ञापन और दावों से जुड़े मौजूदा नियमों में भी ऐसी शर्तें निर्धारित हैं. यानी किसी सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर के लिए सिर्फ ब्रांड का दावा दोहराना पर्याप्त नहीं होगा, खासकर तब जब वह दावा वैज्ञानिक या नियामकीय आधार पर साबित न हो.
सेलिब्रिटी की जिम्मेदारी भी होगी
FSSAI की ताजा चेतावनी का सबसे अहम पहलू यह है कि भ्रामक प्रचार की जिम्मेदारी केवल निर्माता या विज्ञापनदाता तक सीमित नहीं मानी जा रही. यदि कोई सेलिब्रिटी या इंफ्लुएंसर ऐसे खाद्य उत्पाद का प्रचार करता है जिसमें नियमों के विपरीत या अप्रमाणित दावा किया गया है, तो उसके खिलाफ भी लागू कानूनों के तहत कार्रवाई और जुर्माने का जोखिम हो सकता है.
“100 फीसदी प्योर” जैसे दावों पर भी शिकंजा
FSSAI का यह सख्त रुख हाल के दूसरे मामलों से भी जुड़ा है. अगस्त की शुरुआत में नियामक ने डाबर इंडिया के कई उत्पादों पर “100 Percent” जैसे दावों को लेकर कार्रवाई की थी. FSSAI ने ऐसे दावों को अस्पष्ट, सत्यापित न किए जा सकने वाला और उपभोक्ताओं को गुमराह करने वाला बताया था.
सोशल मीडिया पर फर्जी जानकारी भी निशाने पर
FSSAI लंबे समय से सोशल मीडिया पर फैलने वाली खाद्य संबंधी फर्जी और भ्रामक जानकारियों पर भी लोगों को सतर्क करता रहा है. उसकी आधिकारिक “Myth Buster” पहल में खाद्य पदार्थों से जुड़े वायरल दावों की तथ्य-जांच और वैज्ञानिक स्पष्टीकरण उपलब्ध कराए जाते हैं.
उपभोक्ताओं के लिए क्या बदलेगा?
इस कार्रवाई का सीधा असर डिजिटल विज्ञापनों पर पड़ सकता है. अब इंफ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज को किसी खाद्य या न्यूट्रिशन प्रोडक्ट का प्रचार करने से पहले उसके हेल्थ संबंधी दावों की विश्वसनीयता पर अधिक सावधानी बरतनी होगी. FSSAI का संदेश स्पष्ट है- लोकप्रिय चेहरा होने का मतलब यह नहीं कि किसी भी दावे को बिना जांचे जनता तक पहुंचाया जा सकता है.
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