House Purchase Financial Goal: किराये के लगातार बढ़ते बोझ के बीच भारत के लोअर-मिडिल-क्लास परिवारों की वित्तीय प्राथमिकताओं में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है. अब कई लोग सिर्फ रोजमर्रा के खर्च और बचत तक सीमित नहीं रहना चाहते, बल्कि अगले कुछ वर्षों में अपना घर खरीदने को सबसे अहम आर्थिक लक्ष्य मान रहे हैं. खास बात यह है कि घर खरीदने की इच्छा महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा मजबूत दिखाई दी है. Home Credit India की ‘The Great Indian Wallet 2026’ रिपोर्ट के ताजा आंकड़े इसी बदलाव की ओर इशारा करते हैं.
40% महिलाओं ने घर खरीदना बताया बड़ा लक्ष्य
रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 40 फीसदी महिला उत्तरदाताओं ने अगले पांच साल की अपनी प्रमुख वित्तीय प्राथमिकताओं में घर खरीदने को शामिल किया. पुरुषों में यह आंकड़ा 29 फीसदी रहा. यानी घर खरीदने की प्राथमिकता के मामले में महिलाओं और पुरुषों के बीच करीब 11 प्रतिशत अंक का अंतर दिखाई दिया.
पूरे लोअर-मिडिल-क्लास सर्वे समूह की बात करें तो 31 फीसदी लोगों ने अगले पांच साल में घर खरीदने को अपनी सबसे बड़ी वित्तीय प्राथमिकता बताया. यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में 8 प्रतिशत अंक ज्यादा है. रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि लोग अब छोटी अवधि के खर्चों के बजाय लंबे समय की आर्थिक सुरक्षा और संपत्ति बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं.
किराये का बढ़ता बोझ भी बड़ी वजह
घर खरीदने की बढ़ती इच्छा के पीछे किराये का खर्च भी एक महत्वपूर्ण वजह के रूप में सामने आता है. रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में औसत मासिक किराया 6,965 रुपये बताया गया, जो घरेलू बजट का करीब 21 फीसदी हिस्सा है. पिछले साल के मुकाबले किराये में 21 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज की गई. वहीं किराना खर्च औसतन 8,505 रुपये यानी कुल बजट का करीब 25 फीसदी रहा.
ऐसे में, लगातार किराया देने वाले परिवारों के सामने यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि लंबे समय में किराये पर खर्च जारी रखा जाए या अपनी क्षमता के अनुसार घर खरीदने की दिशा में कदम बढ़ाया जाए.
घर की चाहत बढ़ी, लेकिन प्रॉपर्टी भी महंगी
दिलचस्प बात यह है कि घर खरीदने की प्राथमिकता ऐसे समय बढ़ी है, जब प्रॉपर्टी की कीमतें भी ऊपर जा रही हैं. रिपोर्ट में RBI के आंकड़ों के हवाले से बताया गया है कि अप्रैल-जून तिमाही में ऑल इंडिया हाउस प्राइस इंडेक्स तिमाही आधार पर 1.1 फीसदी और सालाना आधार पर 3.6 फीसदी बढ़ा.
इसका मतलब साफ है कि अपना घर खरीदने का सपना मजबूत हुआ है, लेकिन उसे पूरा करना आसान नहीं है. बढ़ती कीमतों के बीच डाउन पेमेंट, होम लोन की EMI और नियमित आय का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण रहेगा.
सिर्फ घर ही नहीं, आर्थिक सुरक्षा भी प्राथमिकता
रिपोर्ट के मुताबिक, 85 फीसदी उत्तरदाताओं को भरोसा है कि वे अगले पांच वर्षों में अपने वित्तीय लक्ष्य हासिल कर पाएंगे. घर खरीदने के बाद कारोबार शुरू करना या बढ़ाना 25 फीसदी लोगों की प्रमुख प्राथमिकता रही. बच्चों की शिक्षा, मौजूदा कर्ज चुकाना और चारपहिया वाहन खरीदना भी प्रमुख लक्ष्यों में शामिल रहे.
यानी 2026 में परिवारों की सोच में बड़ा बदलाव दिख रहा है- किराये के घर से निकलकर अपने घर की चाबी हाथ में लेने की चाहत अब सिर्फ सपना नहीं, बल्कि बड़ी वित्तीय प्राथमिकता बनती जा रही है.
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