Political Controversy Assam: असम की राजनीति इन दिनों एक बड़े विवाद के कारण गर्म है, जिसमें कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा आमने-सामने आ गए हैं. पासपोर्ट से जुड़ा यह मामला अब कानूनी लड़ाई और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का रूप ले चुका है. हालात ऐसे हैं कि पुलिस कार्रवाई, एफआईआर और तलाशी तक की नौबत आ गई है.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब पवन खेड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी के पास एक नहीं, बल्कि कई विदेशी पासपोर्ट हैं. उन्होंने दावा किया कि यह गंभीर कानूनी मामला है, क्योंकि भारत में दोहरी नागरिकता की अनुमति नहीं है. खेड़ा ने यह भी आरोप लगाया कि सरमा परिवार के विदेशों में संपत्ति और बड़े वित्तीय नेटवर्क से जुड़े कनेक्शन हैं. इन आरोपों ने असम की राजनीति में भूचाल ला दिया.
CM का पलटवार और “फेक AI” का आरोप
इन आरोपों पर हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह पूरा मामला “फर्जी और AI से तैयार किए गए दस्तावेजों” पर आधारित है और इसे एक साजिश बताया. उन्होंने कांग्रेस पर विदेशी स्रोतों से मिली जानकारी के जरिए उनकी छवि खराब करने का आरोप लगाया और सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी.
एफआईआर और पुलिस की कार्रवाई
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब मुख्यमंत्री की पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि और फर्जी दस्तावेज पेश करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई. इसके बाद असम पुलिस ने दिल्ली स्थित पवन खेड़ा के आवास पर पहुंचकर तलाशी ली. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस उन्हें तलाश रही है और मामले की जांच जारी है. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि तलाशी के दौरान खेड़ा घर पर मौजूद नहीं थे, जिससे विवाद और बढ़ गया.
“पवन खेड़ा को पवन पेड़ा बना देंगे” बयान
इस पूरे विवाद के दौरान हिमंत बिस्वा सरमा का एक बयान भी काफी चर्चा में रहा, जिसमें उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पवन खेड़ा को “पवन पेड़ा” बना देंगे. यह बयान राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने इस विवाद को और तीखा बना दिया.
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार एजेंसियों का इस्तेमाल कर विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रही है. कांग्रेस का दावा है कि खेड़ा ने जो सवाल उठाए, वे जनहित में थे और उनकी जांच होनी चाहिए.
चुनावी माहौल में बढ़ा विवाद
यह पूरा विवाद ऐसे समय सामने आया है जब असम में चुनावी माहौल गर्म है. ऐसे में, यह मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है. दोनों पक्ष इसे अपने-अपने तरीके से जनता के सामने रख रहे हैं.
कानूनी कार्रवाई और चुनावी गणित के बीच फंसा विवाद
पवन खेड़ा और हिमंत बिस्वा सरमा के बीच पासपोर्ट विवाद अब केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि कानूनी और राजनीतिक लड़ाई में बदल चुका है. जहां एक ओर पुलिस जांच जारी है, वहीं दूसरी ओर यह मामला चुनावी राजनीति को भी प्रभावित कर रहा है. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि जांच में क्या सच सामने आता है और इसका राजनीतिक असर कितना गहरा होता है.
यह भी पढ़ें- महिला आरक्षण बिल को मिला जमीनी समर्थन, यूपी-बिहार से कश्मीर तक गूंज




