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राम मंदिर दान चोरी कांड: सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार, CJI की 3 जजों की पीठ में कौन-कौन शामिल?

Ram Mandir Donation Theft Case: अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी मामले में अब सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है. पहले तत्काल सुनवाई से इनकार करने के बाद अब शीर्ष अदालत ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है. यह मामला केवल कथित करोड़ों रुपए के दान में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में श्रद्धालुओं के विश्वास और मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता से भी जुड़ गया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ 13 जुलाई को मामले की सुनवाई करेगी. इस पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. एस. मोहना भी शामिल हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने पहले तत्काल सुनवाई से क्यों किया था इनकार?
जून 2026 के अंत में याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की थी. उस समय अदालत ने यह कहते हुए तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया था कि इसमें ऐसी कोई आपात स्थिति नहीं है, जिसके लिए विशेष प्राथमिकता दी जाए. अदालत ने संकेत दिया था कि मामला नियमित प्रक्रिया के तहत सूचीबद्ध किया जाएगा. अब नियमित प्रक्रिया के तहत यह मामला CJI की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष आने वाला है, जिससे याचिकाकर्ताओं की मांगों पर न्यायिक विचार शुरू होगा.

CJI की पीठ में कौन-कौन से जज हैं?
सुप्रीम कोर्ट की जिस तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष यह मामला सूचीबद्ध हुआ है, उसमें शामिल हैं—

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची
न्यायमूर्ति वी. एस. मोहना

यही पीठ याचिकाओं की प्रारंभिक सुनवाई करेगी और आगे की जांच या अन्य निर्देशों पर विचार करेगी.

याचिकाओं में क्या मांग की गई है?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में मुख्य रूप से मांग की गई है कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित गड़बड़ियों की जांच किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी, विशेषकर CBI या बहु-एजेंसी जांच तंत्र से कराई जाए. कुछ याचिकाओं में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की भी मांग की गई है, ताकि निष्पक्षता बनी रहे. बताया गया है कि इस विषय पर अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिनमें एक सांसद द्वारा दायर याचिका भी शामिल है.

अब तक जांच में क्या हुआ?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की जांच कर रही है. जांच एजेंसियों ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है और प्रारंभिक जांच में दान की गिनती और प्रबंधन से जुड़े कथित अनियमितताओं की पड़ताल की जा रही है. SIT को विस्तृत जांच के लिए अतिरिक्त समय भी दिया गया है, ताकि पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की जांच की जा सके.

ट्रस्ट ने भी उठाए कदम
दान चोरी के आरोप सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्रशासनिक स्तर पर कई बदलाव किए. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार किए गए. साथ ही नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करने और प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नई समिति गठित की गई. ट्रस्ट का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और श्रद्धालुओं के विश्वास से कोई समझौता नहीं होगा.

राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है. विपक्षी दलों ने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है. दूसरी ओर, भाजपा और उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा. इस बीच, विभिन्न राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर अलग-अलग बयान दिए हैं, जिससे मामला राजनीतिक बहस का विषय भी बन गया है.

अब सुप्रीम कोर्ट में आगे क्या होगा?
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर है. अदालत सबसे पहले यह तय करेगी कि याचिकाओं पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं, और क्या मौजूदा SIT जांच पर्याप्त है अथवा किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराए जाने की जरूरत है. अदालत आवश्यक समझे जाने पर केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित ट्रस्ट से जवाब भी मांग सकती है. फिलहाल, सुनवाई सूचीबद्ध होने से यह स्पष्ट हो गया है कि शीर्ष अदालत इस संवेदनशील मामले पर विधिक रूप से विचार करेगी, जबकि अंतिम निर्णय सुनवाई के बाद ही सामने आएगा.

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