US Iran Conflict: मध्य पूर्व में घोषित युद्धविराम के बावजूद तनाव कम होता नहीं दिख रहा है. अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य ठिकानों पर ताजा हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. ईरान की इस कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान पर तेल निर्यात से जुड़े प्रतिबंधों को दोबारा सख्त कर दिया है, जिससे कूटनीतिक तनाव और गहरा गया है.
क्या हुआ अमेरिकी हमले में?
अमेरिकी सेना ने 7 जुलाई को ईरान के दक्षिणी हिस्से में कई सैन्य ठिकानों, ड्रोन लॉन्च साइटों, तटीय रडार सिस्टम और अन्य सैन्य संसाधनों पर हवाई हमले किए. अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई. अमेरिका का आरोप है कि इन घटनाओं के पीछे ईरान समर्थित तत्वों की भूमिका रही.
ईरान ने कैसे किया पलटवार?
अमेरिकी कार्रवाई के कुछ ही घंटों बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. ईरान ने दावा किया कि उसने अमेरिकी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया और एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को भी मार गिराया. हालांकि अमेरिकी पक्ष ने इन सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है.
कुवैत और बहरीन में क्या हुआ?
कुवैत और बहरीन में हमलों के दौरान एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए. कई स्थानों पर एयर रेड सायरन बजाए गए और सुरक्षा एजेंसियों ने मिसाइलों व ड्रोन को रोकने का प्रयास किया. दोनों देशों ने अपने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है. फिलहाल बड़े पैमाने पर जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
अमेरिका ने कौन से नए प्रतिबंध लगाए?
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान को दी गई तेल निर्यात संबंधी राहत समाप्त कर दी है. इसके बाद ईरान के वैध तेल निर्यात पर फिर से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं. वाशिंगटन का कहना है कि जब तक ईरान क्षेत्रीय सुरक्षा और समुद्री व्यापार को खतरे में डालने वाली गतिविधियां बंद नहीं करता, तब तक आर्थिक दबाव जारी रहेगा.
ईरान का आरोप क्या है?
ईरान ने अमेरिका पर पहले हुए युद्धविराम और आपसी समझ के उल्लंघन का आरोप लगाया है. तेहरान का कहना है कि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई और नए प्रतिबंध लगाकर विश्वास तोड़ा है. ईरानी नेतृत्व ने चेतावनी दी है कि यदि हमले जारी रहे तो और कड़े जवाब दिए जाएंगे व वार्ता की प्रक्रिया पूरी तरह रुक सकती है.
होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों बना विवाद की जड़?
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद लगातार बढ़ रहा है. हाल के दिनों में कई व्यावसायिक जहाजों पर हमलों के बाद अमेरिका ने सुरक्षा बढ़ा दी, जबकि ईरान इस क्षेत्र में अपने अधिकारों और भूमिका पर जोर देता रहा है. इसी मुद्दे ने दोनों देशों के बीच टकराव को और तेज कर दिया है.
तेल बाजार पर क्या असर पड़ा?
तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली. निवेशकों को आशंका है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित होती है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. यही कारण है कि ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है.
अब तक की प्रमुख घटनाएं
1. अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र में जहाजों पर हमलों के बाद ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए.
2. ईरान ने जवाबी कार्रवाई में बहरीन और कुवैत स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन दागे.
3. कुवैत और बहरीन ने एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय किए और सुरक्षा अलर्ट जारी किया.
4. अमेरिका ने ईरान की तेल निर्यात संबंधी राहत समाप्त कर फिर से कड़े प्रतिबंध लागू किए.
5. ईरान ने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया और आगे भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी.
6. कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं कमजोर पड़ गई हैं और क्षेत्र में सैन्य तनाव बना हुआ है.
नरमी के कोई संकेत नहीं, बढ़ती जा रही वैश्विक चिंता
8 जुलाई 2026 तक स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है. अमेरिका और ईरान दोनों ने अपने-अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई है. खाड़ी देशों ने सुरक्षा बढ़ा दी है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और वार्ता के जरिए समाधान निकालने की अपील कर रहा है. फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि संघर्ष पूर्ण युद्ध का रूप लेगा या कूटनीतिक प्रयासों से तनाव कम होगा, लेकिन मौजूदा हालात मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों के लिए चिंता का विषय बने हुए हैं.
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