Swati Maliwal Allegations Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी में शुक्रवार को बड़ी टूट देखने को मिली. राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत 7 सांसदों ने पार्टी से दूरी बना ली और बीजेपी में शामिल हो गए. दिल्ली की सियासत में बड़ा भूचाल तब आया, जब राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया. पार्टी से अलग होने के बाद मालीवाल ने खुलकर अपनी चुप्पी तोड़ी और अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए. उनका दावा है कि पिछले दो सालों से उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था और उनकी आवाज दबाई जा रही थी.
संसद में बोलने से रोका गया
स्वाति मालीवाल ने आरोप लगाया कि उन्हें पिछले दो सालों में संसद में बोलने का मौका तक नहीं दिया गया. उनका कहना है कि यह सिर्फ राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से उनकी आवाज दबाने की कोशिश थी. उन्होंने इसे “बेहद शर्मनाक” बताया और कहा कि एक सांसद को बोलने से रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है.
FIR वापस लेने का दबाव
स्वाति ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के आवास पर उनके साथ मारपीट की गई. उनके सबसे गंभीर आरोपों में से एक यह है कि उन पर FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया. उनका कहना है कि जब उन्होंने अपने साथ हुई मारपीट के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें डराया-धमकाया गया और केस वापस लेने के लिए मजबूर किया गया.
धमकी और डराने की कोशिश
मालीवाल ने यह भी कहा कि जब उन्होंने पार्टी के अंदर हो रही घटनाओं के खिलाफ आवाज उठाई, तो उन्हें लगातार धमकियों का सामना करना पड़ा. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी शिकायतों को दबाने की कोशिश की और उन्हें चुप रहने के लिए मानसिक दबाव में रखा गया.
महिला विरोधी रवैये का आरोप
स्वाति मालीवाल ने अरविंद केजरीवाल पर “महिला विरोधी” होने का आरोप भी लगाया. उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर महिलाओं की आवाज को महत्व नहीं दिया जाता और उनके मुद्दों को नजरअंदाज किया जाता है. यही कारण था कि उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला लिया.
राजनीतिक और वैचारिक मतभेद
मालीवाल ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका फैसला सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि वैचारिक भी है. उन्होंने कहा कि पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटक चुकी है और कई मुद्दों पर उनका रुख उनसे मेल नहीं खाता था, खासकर महिला आरक्षण जैसे विषय पर.
बीजेपी में शामिल होने पर क्या बोलीं?
बीजेपी में शामिल होने पर मालीवाल ने कहा कि उन्होंने यह कदम किसी दबाव में नहीं, बल्कि अपने विश्वास के आधार पर उठाया है. उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि अब वह “रचनात्मक राजनीति” करना चाहती हैं.
अंदरूनी राजनीति पर गहराया संकट
स्वाति मालीवाल के इन खुलासों ने दिल्ली की राजनीति में हलचल मचा दी है. दबाव, धमकी और आवाज दबाने जैसे आरोपों ने आम आदमी पार्टी की अंदरूनी राजनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह मामला सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आने वाले समय में यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, जहां सच्चाई, राजनीति और जनता की धारणा तीनों की परीक्षा होगी.
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