Homeबैंकबैंक अकाउंट में नॉमिनी नहीं? जानिए पैसा निकालने का कानूनी तरीका

बैंक अकाउंट में नॉमिनी नहीं? जानिए पैसा निकालने का कानूनी तरीका

Bank Account Settlement After Death: आज के दौर में बैंक अकाउंट सिर्फ पैसे रखने की जगह नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा का अहम आधार बन चुका है. लेकिन जब किसी खाताधारक की मृत्यु हो जाती है और उसने अपने खाते में किसी को नॉमिनी नहीं बनाया होता, तब परिजनों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि बैंक में जमा पैसा कैसे निकाला जाए. ऐसी स्थिति में बैंक किसी भी व्यक्ति को सीधे पैसा नहीं देता, क्योंकि उसकी जिम्मेदारी होती है कि रकम केवल सही कानूनी वारिस तक ही पहुंचे. यही वजह है कि पूरी प्रक्रिया जांच और दस्तावेजों पर आधारित होती है.

बैंक से पैसा निकालने की प्रक्रिया क्या है?
नॉमिनी न होने की स्थिति में मृतक के परिवार के सदस्य या कानूनी वारिस को बैंक में क्लेम करना पड़ता है. इसके लिए उन्हें मृत्यु प्रमाण पत्र, पहचान और पते का प्रमाण, साथ ही लीगल हेयर सर्टिफिकेट या उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जमा करना होता है. कई मामलों में अन्य वारिसों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी लिया जाता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पैसे के वितरण को लेकर कोई विवाद नहीं है. बैंक इन सभी दस्तावेजों की जांच करता है और पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही खाते की राशि जारी करता है.

नए नियमों से क्या मिली राहत?
हाल के वर्षों में नियमों को थोड़ा आसान बनाया गया है, जिससे आम लोगों को राहत मिली है. अब अगर खाते में जमा राशि एक तय सीमा (15 लाख) तक है और कोई विवाद नहीं है, तो बैंक बिना कोर्ट के आदेश के भी पैसा जारी कर सकता है. इसका उद्देश्य यही है कि परिवार को लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रिया से बचाया जा सके और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता मिल सके.

ज्यादा रकम होने पर क्या बदल जाता है?
अगर खाते में बड़ी रकम जमा होती है, तो प्रक्रिया थोड़ी सख्त हो जाती है. ऐसे मामलों में अदालत से सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना जरूरी हो सकता है और बैंक भी अतिरिक्त जांच करता है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि भविष्य में किसी तरह का कानूनी विवाद न खड़ा हो. इसलिए बड़ी राशि के मामलों में समय और कागजी प्रक्रिया दोनों ज्यादा लगते हैं.

नॉमिनी और कानूनी वारिस में अंतर समझें
अक्सर लोग नॉमिनी को ही असली मालिक समझ लेते हैं, जबकि ऐसा नहीं है. नॉमिनी केवल वह व्यक्ति होता है जिसे बैंक अस्थायी रूप से पैसा सौंपता है, यानी नॉमिनी सिर्फ पैसा निकालने का अधिकार रखता है, जबकि असली अधिकार कानूनी वारिसों का होता है. यानी नॉमिनी होने के बावजूद अंततः रकम का सही बंटवारा कानूनी वारिसों के बीच ही होता है.

एक से ज्यादा नॉमिनी की सुविधा
बैंकिंग सिस्टम में हाल ही में एक अहम बदलाव किया गया है, जिसके तहत अब एक बैंक खाते में एक से अधिक नॉमिनी जोड़ने की सुविधा दी जा रही है. इससे भविष्य में विवाद की संभावना कम होगी और परिवार के अलग-अलग सदस्यों को उनका हिस्सा आसानी से मिल सकेगा.

समय रहते नॉमिनी बनाएं, परिवार को परेशानी से बचाएं
अगर किसी व्यक्ति ने अपने बैंक खाते में नॉमिनी नहीं जोड़ा है, तो उसके बाद पैसे निकालना संभव तो है, लेकिन इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है. इसलिए बेहतर यही है कि हर व्यक्ति अपने खाते में समय रहते नॉमिनी जरूर जोड़े, ताकि मुश्किल समय में परिवार को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े.

यह भी पढ़ें- मेरठ से प्रयागराज अब 6 घंटे में, गंगा एक्सप्रेसवे का पीएम मोदी ने किया शुभारंभ

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments