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अब अपराधियों की खैर नहीं! Abhigyan App से होगी तुरंत पहचान, सेकंडों में खुल जाएगी पूरी हिस्ट्रीशीट

NCRB Abhigyan App: भारत में पुलिसिंग अब तेजी से डिजिटल हो रही है. इसी दिशा में गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने पुलिस बल को एक नया तकनीकी हथियार सौंपा है- ‘अभिज्ञान (ABHIGYAN) ऐप’. 19 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऐप को लॉन्च किया, जिसके बाद इसे देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. यह ऐप पुलिसकर्मियों को मौके पर ही किसी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करने और उसके आपराधिक रिकॉर्ड तक पहुंचने की सुविधा देगा.

क्या है अभिज्ञान ऐप?
अभिज्ञान ऐप एक मोबाइल आधारित पहचान प्रणाली है, जिसे पुलिस अधिकारियों के लिए विकसित किया गया है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि पुलिसकर्मी केवल फिंगरप्रिंट स्कैन करके किसी व्यक्ति की पहचान सत्यापित कर सकते हैं. इसके लिए संदिग्ध को थाने ले जाने या लंबी कागजी प्रक्रिया पूरी करने की आवश्यकता नहीं होगी.

यह ऐप दरअसल देश की National Automated Fingerprint Identification System (NAFIS) तकनीक का मोबाइल संस्करण माना जा रहा है, जिससे फील्ड में मौजूद पुलिसकर्मियों को सीधे राष्ट्रीय डेटाबेस तक पहुंच मिल सकेगी.

एक अंगूठा और सामने आ जाएगी पूरी हिस्ट्रीशीट
अब तक किसी व्यक्ति की आपराधिक पृष्ठभूमि की जांच के लिए पुलिस को थाने, सर्वर या रिकॉर्ड रूम पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन अभिज्ञान ऐप के जरिए पुलिसकर्मी मौके पर ही फिंगरप्रिंट स्कैन करेंगे और कुछ ही सेकंड में संबंधित व्यक्ति का रिकॉर्ड स्क्रीन पर दिखाई देने लगेगा.

यदि कोई व्यक्ति पहले किसी अपराध में गिरफ्तार हो चुका है, उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज है या वह किसी जांच एजेंसी के रिकॉर्ड में मौजूद है, तो उसकी जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकेगी. इससे फरार अपराधियों, आदतन अपराधियों और फर्जी पहचान वाले संदिग्धों को पकड़ना काफी आसान हो जाएगा.

1.3 करोड़ से ज्यादा फिंगरप्रिंट का विशाल डेटाबेस
अभिज्ञान ऐप की ताकत उसके विशाल डेटा नेटवर्क में छिपी है. NCRB के अनुसार, यह ऐप NAFIS डेटाबेस से जुड़ा हुआ है, जिसमें देशभर के लगभग 1.3 करोड़ फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड मौजूद हैं. यह दुनिया के सबसे बड़े आपराधिक फिंगरप्रिंट डेटाबेस में से एक माना जाता है.

ऐसे में, यदि कोई अपराधी एक राज्य में अपराध करके दूसरे राज्य में छिप जाता है, तब भी उसकी पहचान कुछ ही सेकंड में की जा सकती है. इससे राज्यों के बीच समन्वय और अपराधियों की ट्रैकिंग पहले की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी हो सकती है.

सड़क पर चलते-चलते भी हो सकेगी जांच
अभिज्ञान ऐप की सबसे बड़ी विशेषता इसकी पोर्टेबिलिटी है. पुलिसकर्मी अपने स्मार्टफोन के माध्यम से ही जांच कर सकेंगे. किसी नाके, रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, बाजार या सार्वजनिक कार्यक्रम में संदिग्ध व्यक्ति की पहचान तुरंत की जा सकेगी.

इससे पुलिस को बार-बार थाने लौटने की जरूरत कम होगी और जांच प्रक्रिया तेज होगी. अधिकारियों का मानना है कि इससे अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण मदद मिलेगी.

सुरक्षा और गोपनीयता पर भी विशेष जोर
किसी भी अपराध डेटा प्रणाली में सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा होता है. इसलिए अभिज्ञान ऐप में टू-स्टेप ऑथेंटिकेशन जैसी सुरक्षा व्यवस्था जोड़ी गई है. केवल अधिकृत पुलिस अधिकारी ही इस ऐप का उपयोग कर सकेंगे.

NCRB और गृह मंत्रालय पहले से ही विभिन्न डिजिटल पुलिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपराध और अपराधियों से जुड़ा डेटा सुरक्षित तरीके से संचालित कर रहे हैं. डिजिटल पुलिस नेटवर्क का उद्देश्य जांच को तेज करना है, जबकि डेटा तक पहुंच केवल अधिकृत अधिकारियों तक सीमित रहती है.

स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में बड़ा कदम
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने पुलिस आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया है. CCTNS, ICJS, डिजिटल पुलिस पोर्टल और NAFIS जैसी परियोजनाओं के बाद अब अभिज्ञान ऐप को उसी श्रृंखला का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है.

विशेषज्ञों का मानना है कि अपराधियों की पहचान में लगने वाला समय घटने से जांच की गुणवत्ता बेहतर होगी और पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ेगी. इससे फर्जी पहचान, नकली दस्तावेज और छद्म नामों का इस्तेमाल करने वाले अपराधियों पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव होगा.

राज्यों में चरणबद्ध तरीके से होगा विस्तार
लॉन्च के साथ ही यह संकेत दिए गए हैं कि ऐप को देशभर में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. इसके लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, ताकि वे तकनीक का अधिकतम उपयोग कर सकें. प्रशिक्षण पूरा होने के बाद विभिन्न राज्यों की पुलिस इकाइयों को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा.

अपराधियों के लिए पहचान छिपाना होगा मुश्किल
अभिज्ञान ऐप का लॉन्च भारत की डिजिटल पुलिसिंग यात्रा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है. यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो अपराधियों की पहचान, गिरफ्तारी और जांच प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

आने वाले महीनों में इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य पुलिस बल इसे कितनी तेजी से अपनाते हैं और फील्ड स्तर पर इसका उपयोग कितना प्रभावी साबित होता है. फिलहाल इतना तय है कि अब अपराधियों के लिए केवल नाम बदलकर या पहचान छिपाकर बच निकलना पहले जितना आसान नहीं रहेगा.

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