US Airstrike on Iran: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. अमेरिका ने 30 जुलाई 2026 को ईरान के खिलाफ ताजा हवाई हमलों की पुष्टि की है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह कार्रवाई एक दिन पहले क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सैन्य ठिकानों पर ईरान समर्थित हमलों व ईरानी मिसाइल गतिविधियों के जवाब में की गई. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ऑपरेशन का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता और उन ठिकानों को निशाना बनाना था, जहां से अमेरिकी बलों पर हमलों की योजना बनाई जा रही थी.
तेहरान और दक्षिण-पश्चिमी इलाकों में धमाकों की खबरें
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की राजधानी तेहरान के अलावा अबादान और केशम द्वीप के आसपास भी कई विस्फोटों की सूचना मिली है. इन क्षेत्रों का इस्तेमाल सैन्य लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक गतिविधियों के लिए किया जाता है. हालांकि ईरानी प्रशासन ने सभी नुकसान का आधिकारिक ब्योरा जारी नहीं किया है, लेकिन स्थानीय मीडिया ने कई सैन्य और सुरक्षा प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचने की बात कही है. नागरिक हताहतों के संबंध में स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है.
अमेरिका ने क्या कहा?
CENTCOM ने अपने बयान में कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य के हमलों को रोकने के उद्देश्य से की गई है. अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि ईरान समर्थित हमलों को रोकने के लिए आवश्यक और सीमित सैन्य कार्रवाई की गई है. वहीं अमेरिकी नेतृत्व ने संकेत दिया है कि यदि अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रहे तो आगे भी जवाबी कार्रवाई की जा सकती है.
ईरान का रुख और बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है. इससे पहले ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ गया. इस पूरे घटनाक्रम के कारण खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है.
वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष का असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है, क्योंकि निवेशकों को आशंका है कि यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. ऊर्जा बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में तेल और गैस की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
कूटनीतिक प्रयास जारी, लेकिन हालात नाजुक
संघर्ष को रोकने के लिए विभिन्न देशों की ओर से कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन फिलहाल किसी ठोस समझौते के संकेत नहीं मिले हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं तो यह संकट पूरे पश्चिम एशिया में व्यापक अस्थिरता पैदा कर सकता है. फिलहाल अमेरिका और ईरान दोनों की सैन्य गतिविधियों पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है.
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