BRICS Summit 2026: नई दिल्ली में आज यानी 12 सितंबर 2026 से 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो रही है. भारत इस वर्ष ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और राजधानी में आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को चलेगा. सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों के शीर्ष नेता वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग, व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा करेंगे.
‘Resilience, Innovation, Cooperation, Sustainability’ पर जोर
भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का मुख्य विषय “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” रखा गया है. इसके तहत भारत का जोर ब्रिक्स को केवल राजनीतिक मंच के बजाय व्यावहारिक और समाधान-केंद्रित सहयोग के मंच के रूप में मजबूत करने पर है.
सरकार के मुताबिक, भारत की अध्यक्षता के दौरान सालभर में 25 शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्चस्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं. इनमें कृषि, डिजिटल तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त, पर्यावरण और नवाचार जैसे क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम हुआ है.
11 देशों का समूह, बढ़ा वैश्विक प्रभाव
वर्तमान में ब्रिक्स में 11 सदस्य देश हैं- ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया. भारत सरकार के अनुसार, ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं.
ब्रिक्स के विस्तार के बाद समूह के भीतर अलग-अलग आर्थिक और रणनीतिक प्राथमिकताएं भी सामने आई हैं. ऐसे में, नई दिल्ली सम्मेलन की बड़ी चुनौती सदस्य देशों के बीच सहमति बनाते हुए साझा आर्थिक और वैश्विक एजेंडे को आगे बढ़ाना होगी.
मोदी-पुतिन मुलाकात से पहले ही तेज हुई कूटनीतिक गतिविधियां
शिखर सम्मेलन से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 11 सितंबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से नई दिल्ली में मुलाकात की. दोनों नेताओं ने व्यापार, ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष, बुनियादी ढ़ांचे और लोगों के बीच संपर्क सहित द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की. दोनों ने पश्चिम एशिया और ब्लैक सी क्षेत्र के संघर्षों से पैदा हुई चुनौतियों व समुद्री व्यापार और भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी विचार साझा किए.
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की भारत यात्रा और मोदी-शी मुलाकात पर भी पूरी दुनिया की नजर है. चीन के विदेश मंत्रालय ने दोनों देशों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है.
युद्ध, व्यापार और वैश्विक व्यवस्था पर रहेगी नजर
इस बार ब्रिक्स सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में संघर्ष, वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा जैसे मुद्दे अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं. ऐसे में, सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा, तकनीकी सहयोग व वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषय महत्वपूर्ण रहेंगे.
भारत के लिए यह सम्मेलन वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और अलग-अलग विचार रखने वाले देशों के बीच सहमति बनाने की एक बड़ी कूटनीतिक परीक्षा भी है. दो दिनों में होने वाली बैठकों और चर्चाओं से यह स्पष्ट होगा कि ब्रिक्स अपने बढ़ते आकार को कितने प्रभावी और ठोस सहयोग में बदल पाता है.
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