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Midterm Election में झटके के बाद ट्रंप का बड़ा दांव, विपक्ष के बिलों पर लगाएंगे VETO?

US President Veto Power: अमेरिका की राजनीति में राष्ट्रपति के पास कई ऐसी शक्तियां होती हैं, जिनका इस्तेमाल देश के बड़े फैसलों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है. इन्हीं में से एक है वीटो पावर (Veto Power). इसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति संसद यानी कांग्रेस से पास हुए किसी विधेयक को कानून बनने से रोक सकते हैं. हालांकि, यह शक्ति असीमित नहीं है और अमेरिकी संविधान में इसके इस्तेमाल के लिए कुछ नियम तय किए गए हैं.

अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को हुए मध्यावधि चुनावों के बाद रिपब्लिकन पार्टी को लगे राजनीतिक झटके के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर भी चर्चा तेज हो गई है. ऐसे में, समझना जरूरी है कि आखिर राष्ट्रपति का वीटो पावर क्या है और ट्रंप इसका इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?

क्या होता है अमेरिकी राष्ट्रपति का वीटो पावर?
वीटो का मतलब होता है किसी फैसले या प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार करना. अमेरिका में राष्ट्रपति को यह अधिकार संविधान के आर्टिकल-1, सेक्शन-7 के तहत मिला हुआ है. जब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट किसी बिल को पास कर देते हैं, तो उसे राष्ट्रपति के पास भेजा जाता है.

राष्ट्रपति अगर उस बिल से सहमत नहीं होते हैं तो वे उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर सकते हैं. इसी प्रक्रिया को वीटो कहा जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपति और कांग्रेस के बीच शक्तियों का संतुलन बनाए रखना है.

राष्ट्रपति कितने तरह से कर सकते हैं वीटो का इस्तेमाल?
अमेरिका में राष्ट्रपति के पास मुख्य रूप से दो तरह के वीटो का विकल्प होता है.

1. रेगुलर वीटो (Regular Veto): राष्ट्रपति किसी बिल को वापस कांग्रेस के उसी सदन में भेज सकते हैं, जहां से उसकी शुरुआत हुई थी. इसके साथ राष्ट्रपति अपनी आपत्तियां भी बताते हैं. हालांकि, कांग्रेस के पास इस फैसले को पलटने का अधिकार है. इसके लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों में दो-तिहाई बहुमत से बिल को दोबारा पास करना होगा.

2. पॉकेट वीटो (Pocket Veto): अगर राष्ट्रपति को कोई बिल मिलता है और कांग्रेस 10 दिनों की निर्धारित अवधि (रविवार को छोड़कर) के दौरान स्थगित हो जाती है, जिससे बिल वापस भेजना संभव नहीं रहता, तो राष्ट्रपति उस पर हस्ताक्षर न करके उसे कानून बनने से रोक सकते हैं. इसे पॉकेट वीटो कहते हैं. इस वीटो को कांग्रेस दो-तिहाई बहुमत से भी नहीं पलट सकती.

रिपब्लिकन की हार के बाद ट्रंप का नया प्लान क्या है?
3 नवंबर 2026 को अमेरिका में हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है. पार्टी ने सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, दोनों में रिपब्लिकन से नियंत्रण हासिल कर लिया है. इस नतीजे को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के खिलाफ जनता की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है. रिपोर्टों के मुताबिक, महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत, टैरिफ और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों ने चुनाव में अहम भूमिका निभाई.

चुनाव में हार के बाद ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि वे डेमोक्रेट्स के एजेंडे को आसानी से आगे नहीं बढ़ने देंगे. उन्होंने सोशल मीडिया पर ‘VETO’ लिखा हुआ लाल कैप की तस्वीर साझा की और कहा कि वे डेमोक्रेट्स के ऐसे विधेयकों को वीटो करेंगे, जिन्हें वे अनुचित मानते हैं.

इसका मतलब है कि ट्रंप अब राष्ट्रपति के संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल करके विपक्ष की विधायी योजनाओं को रोकने की रणनीति अपना सकते हैं.

क्या ट्रंप के लिए हर बिल रोकना आसान होगा?
ऐसा नहीं है कि ट्रंप हर बिल को आसानी से रोक सकते हैं. अगर राष्ट्रपति किसी बिल पर वीटो लगाते हैं, तो कांग्रेस उसे दोबारा पास कर सकती है. इसके लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट, दोनों में दो-तिहाई वोट की जरूरत होती है.

यानी अगर दोनों सदनों में दो-तिहाई सदस्य बिल के समर्थन में वोट करते हैं, तो राष्ट्रपति का वीटो हटाया जा सकता है और बिल कानून बन सकता है. इसलिए ट्रंप के पास बिल रोकने की ताकत तो है, लेकिन कांग्रेस भी उनके फैसले को चुनौती दे सकती है.

आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप और डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच सत्ता की यह खींचतान अमेरिकी राजनीति को किस दिशा में ले जाती है.

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