Sugar Prices Drop: देश में अचानक बढ़े चीनी के दामों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार की सख्ती का असर अब बाजार में दिखने लगा है. पिछले कुछ दिनों में चीनी की थोक और मिल स्तर की कीमतों में अच्छी गिरावट आई है. महाराष्ट्र में मिल स्तर पर चीनी का भाव करीब 51-52 रुपए प्रति किलो तक आ गया है. हालांकि, यह खुदरा दुकानों का भाव नहीं है. आम ग्राहकों के लिए बाजार में कीमत अभी इससे अधिक है.
चार दिन में 8 रुपये तक सस्ती
ताजा बाजार रिपोर्ट के मुताबिक, कई शहरों में खुदरा चीनी के दाम भी नीचे आए हैं. दिल्ली में बुधवार को चीनी करीब 62 रुपए किलो बिकी, जबकि इसका हालिया ऊपरी स्तर 68 रुपये था. कानपुर में भाव 69 से घटकर करीब 62 रुपए, मुंबई में 68 से घटकर 61 रुपए, गुवाहाटी में 71 से 63 रुपए और हैदराबाद में 70 से घटकर 62 रुपए किलो के आसपास पहुंच गया. चेन्नई में भी कीमत करीब 70 से घटकर 65 रुपए किलो बताई गई है.
इन आंकड़ों से साफ है कि बाजार के अलग-अलग स्तरों पर कीमतों में अंतर है. इसलिए 51 रुपए किलो को पूरे देश का खुदरा रेट समझना सही नहीं होगा. यह महाराष्ट्र में मिल स्तर की कीमत है.
मुंबई में थोक भाव में बड़ी गिरावट
थोक बाजार में भी कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है. मुंबई में चीनी का भाव करीब 5,800 रुपए प्रति क्विंटल पर आ गया है, जबकि 22 अगस्त को यह 6,750 रुपए प्रति क्विंटल के उच्च स्तर तक पहुंच गया था. दिल्ली में थोक भाव करीब 6,000 रुपए प्रति क्विंटल बताया गया है.
सरकार ने क्यों कसी नकेल?
चीनी की कीमतों में तेजी के बीच सरकार ने जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर रोक लगाने के लिए डीलरों पर 400 टन की स्टॉक सीमा लागू की है. यह व्यवस्था 30 नवंबर 2026 तक लागू रहेगी. इसके अलावा 1 सितंबर से बड़े थोक उपभोक्ता 15 दिनों की खपत से अधिक चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेंगे. सरकार और राज्यों की टीमें चीनी मिलों में स्टॉक की जांच भी कर रही हैं.
10 लाख मीट्रिक टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात
घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है. सरकार का उद्देश्य त्योहारी सीजन से पहले बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है. इसके अलावा रिफाइनरों के पास मौजूद करीब 3 से 3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी को घरेलू बाजार में लाने की तैयारी है.
आगे और राहत की उम्मीद
सरकार ने चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से नया पेराई सीजन शुरू करने की तैयारी करने को कहा है. अनुमान है कि अक्टूबर में उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन की तुलना में 10 लाख टन से अधिक हो सकता है. इससे बाजार में सप्लाई बढ़ेगी.
फिलहाल सबसे बड़ी राहत यह है कि तेजी पर ब्रेक लगा है. लेकिन खुदरा बाजार में चीनी कब और कितनी सस्ती होगी, यह स्थानीय सप्लाई, त्योहारी मांग और थोक कीमतों पर निर्भर करेगा. इसलिए 51 रुपए किलो का भाव अभी पूरे देश के ग्राहकों के लिए लागू खुदरा रेट नहीं है.
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