American Professors Visit Keralam Village: केरलम के ग्रामीण जीवन, शिक्षा व्यवस्था, परंपराओं और सामुदायिक संस्थाओं को करीब से समझने के उद्देश्य से अमेरिका के दो प्रोफेसरों ने कोट्टायम जिले के चिरक्कडावु गांव का दौरा किया. इंडियाना यूनिवर्सिटी, अमेरिका की डॉ. सारा हर्विट्ज और डॉ. एडम माल्टीज के लिए यह केरलम की पहली यात्रा थी, जिसमें उन्हें सामान्य पर्यटन स्थलों से अलग गांव की असली संस्कृति और जीवनशैली को जानने का अवसर मिला.
गांव की शिक्षा व्यवस्था को करीब से समझा
अमेरिकी प्रोफेसरों ने चिरक्कडावु के कई प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने गवर्नमेंट एलपी स्कूल, चिरक्कडावु और एमजीएम यूपी स्कूल में शिक्षकों और बच्चों से बातचीत की.
स्कूलों में विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम इस यात्रा का खास आकर्षण रहे. अमेरिकी प्रोफेसरों ने बच्चों की प्रतिभा और स्थानीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में गहरी रुचि दिखाई. वहीं, बच्चों के लिए भी अमेरिकी विश्वविद्यालय के शिक्षाविदों से मिलना एक नया और प्रेरणादायक अनुभव रहा.
यात्रा के दौरान प्रोफेसरों के साथ शिक्षक पी.जी. बीनू समेत अन्य लोग मौजूद रहे. उन्होंने बताया कि विदेशी मेहमानों ने गांव की जीवनशैली, रीति-रिवाजों और परंपराओं को काफी उत्सुकता से समझने की कोशिश की.
1881 से जुड़ी है स्कूल की शैक्षणिक विरासत
चिरक्कडावु का गवर्नमेंट एलपी स्कूल वर्ष 1881 में स्थापित हुआ था. इस ऐतिहासिक स्कूल के माध्यम से प्रोफेसरों को गांव की लंबे समय से चली आ रही शिक्षा परंपरा को समझने का मौका मिला.
इसके अलावा वर्ष 1956 में स्थापित एमजीएम यूपी स्कूल का भी दौरा किया गया. दोनों संस्थानों ने ग्रामीण क्षेत्र में शिक्षा के विकास और बदलती शैक्षणिक व्यवस्था की अलग-अलग तस्वीर पेश की.

केरोसिन लैम्प की रोशनी से शुरू हुई थी ज्योति लाइब्रेरी
दौरे का एक महत्वपूर्ण पड़ाव ज्योति पब्लिक लाइब्रेरी रही. इस पुस्तकालय की कहानी गांव की सामुदायिक भावना और पढ़ने की संस्कृति को दर्शाती है. वर्ष 1968 में साधारण किसानों के एक समूह ने एक छोटी दुकान के कमरे में केरोसिन लैम्प की रोशनी के बीच इस पुस्तकालय की शुरुआत की थी. समय के साथ यह लाइब्रेरी गांव के ज्ञान और सामूहिक प्रयासों का महत्वपूर्ण केंद्र बन गई.
लाइब्रेरी में चर्चा केवल किताबों तक सीमित नहीं रही. यहां अमेरिकी प्रोफेसरों को केरल के पारंपरिक सरपा कावु (पवित्र उपवन) और प्रकृति संरक्षण में उनकी भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई. साथ ही देशी पशुधन के संरक्षण के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी बातचीत हुई.


चिरक्कडावु महादेव मंदिर की परंपराओं से हुए रूबरू
प्रोफेसरों ने गांव के प्रसिद्ध चिरक्कडावु महादेव मंदिर का भी दौरा किया. यहां उन्होंने मंदिर के इतिहास, धार्मिक परंपराओं और स्थानीय त्योहारों के बारे में जानकारी हासिल की. चिरक्कडावु का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी विशेष है. यह क्षेत्र कोट्टायम के कांजीरापल्ली इलाके की समृद्ध सामाजिक और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी विरासत के करीब स्थित है. इससे गांव की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान को एक अलग आयाम मिलता है.
केले के पत्ते पर परोसा गया पारंपरिक ओणम सद्या
दिनभर की यात्रा का समापन पारंपरिक केरल भोजन के साथ हुआ. शिक्षक पी.जी. बीनू के घर पर उनकी मां गौरिकुट्टी और परिवार के अन्य सदस्यों ने अमेरिकी मेहमानों के लिए विशेष ओणम सद्या तैयार की. केले के पत्ते पर परोसे गए भोजन में चावल, दाल, पापड़ और कई पारंपरिक केरल व्यंजन शामिल थे. भोजन का समापन प्रसिद्ध अडा प्रदमन के साथ हुआ.
यह यात्रा अमेरिकी प्रोफेसरों के लिए केवल एक ग्रामीण भ्रमण नहीं रही, बल्कि शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण संरक्षण, इतिहास और केरल की पारंपरिक मेहमाननवाजी को करीब से समझने का एक यादगार अनुभव बन गई. चिरक्कडावु गांव ने एक बार फिर दिखाया कि भारत के छोटे गांवों में इतिहास, ज्ञान और संस्कृति की कितनी समृद्ध विरासत छिपी हुई है.
यह भी पढ़ें- भारत-बेल्जियम संबंधों का नया अध्याय! रक्षा, व्यापार और टेक्नोलॉजी पर बढ़ी साझेदारी




