PM Modi Attacks Opposition: भारतीय अर्थव्यवस्था ने 7.8% की तिमाही जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की तो देश में एक अजीब किस्म की बेचैनी दिखाई देने लगी. आंकड़े मजबूत हुए तो सवाल आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठने लगे. इसी सियासी माहौल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष और सरकार की उपलब्धियों पर लगातार सवाल उठाने वाले आलोचकों पर तीखा हमला बोला.
श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में पीएम मोदी ने कहा कि जो लोग कभी भारत को ‘कमजोर पांच’ यानी Fragile 5 देशों की श्रेणी में रखते थे, वही लोग आज भारत की आर्थिक प्रगति के आंकड़े देखकर परेशान नजर आ रहे हैं.
देश आगे बढ़ा, लेकिन आलोचना का ब्रेक नहीं लगा
प्रधानमंत्री ने सरकार के कार्यकाल में जीडीपी वृद्धि समेत देश में हुए सकारात्मक बदलावों पर सवाल उठाने वालों को ‘जन्मजात निराशावादी’ और हर बात में दोष तलाशने वाला बताया. उनका तंज साफ था- देश की अर्थव्यवस्था आगे बढ़ रही है, लेकिन कुछ लोगों की राजनीतिक उम्मीदें शायद उसी रफ्तार से पीछे जा रही हैं.
पीएम मोदी ने आरोप लगाया कि देश की प्रगति से चिढ़ने वाले लोग ‘झूठ का अभियान’ चला रहे हैं. यानी अर्थव्यवस्था के आंकड़े चाहे जितने मजबूत हों, अगर राजनीतिक चश्मे का नंबर नहीं बदला तो तस्वीर धुंधली ही दिखाई देगी.
विपक्ष की तुलना नाराज फूफा से
प्रधानमंत्री ने कांग्रेस और दूसरे विपक्षी दलों पर व्यंग्य करते हुए उनकी तुलना परिवार के उस ‘नाराज फूफा’ से कर दी, जिन्हें शादी में खाना कितना भी अच्छा मिले, शिकायत दाल में नमक से ही शुरू करनी होती है.
उनका कहना था कि विपक्ष को हर अच्छी बात में कमी निकालने की आदत पड़ गई है और इन्हें गिलास आधा भरा हुआ नहीं, हमेशा आधा खाली ही नजर आता है.
जनधन से मेक इन इंडिया तक, विरोध की पुरानी फाइल खुली
पीएम मोदी ने कहा कि जीडीपी पर संदेह जताने वाले वही लोग हैं, जिन्होंने जनधन योजना से लेकर मेक इन इंडिया तक सरकार की कई पहलों का विरोध किया था.
प्रधानमंत्री के इस तंज का मतलब साफ था- सरकार कोई योजना शुरू करे तो सवाल, योजना आगे बढ़े तो सवाल और आंकड़े बेहतर आएं तो आंकड़ों पर ही सवाल. यानी समस्या योजना में है या फिर योजना चलाने वालों के नाम में, यह बहस विपक्ष और सरकार के बीच पुरानी है.
युद्ध और वैश्विक संकट के बीच 7.8% की रफ्तार
पीएम मोदी ने कहा कि यूरोप और पश्चिम एशिया में जारी युद्धों व वैश्विक भू-राजनीतिक संकटों के बावजूद भारत ने 7.8% की प्रभावशाली तिमाही जीडीपी वृद्धि हासिल की है. उन्होंने आलोचकों के ‘झूठ के अभियान’ पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘झूठ की गूंज’ के मुकाबले अंततः ‘सत्य की हुंकार’ ही प्रबल होगी.
‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर भी पीएम का पलटवार
अपने भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी को लेकर जारी विवाद का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “मैंने होम्योपैथिक गोली दी थी और सारे ‘दिमागी नक्सल’ रेंगते हुए बाहर आ गए.” पीएम मोदी ने कहा कि देश की जनता अब इस मानसिकता को बढ़ावा देने वालों का असली चेहरा पहचान चुकी है.
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री का संदेश यही रहा- अर्थव्यवस्था के आंकड़े मजबूत हों तो उनका स्वागत कीजिए, लेकिन अगर हर उपलब्धि में भी राजनीतिक खामी खोजनी है, तो फिर कैलकुलेटर से ज्यादा चश्मे की जरूरत पड़ सकती है.
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