Delhi Building Collapse 2026: दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार, 6 सितंबर 2026 को एक बहुमंजिला इमारत अचानक ढ़ह गई. हादसा दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ और इसके बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इमारत का इस्तेमाल छात्रों के लिए पीजी/हॉस्टल के रूप में किया जा रहा था. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था.
कहां और कब हुआ हादसा?
यह हादसा दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन, दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास हुआ. पुलिस को करीब 1:34 बजे इमारत गिरने की सूचना मिली. देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई और अंदर मौजूद लोगों के दबे होने की आशंका सामने आई.
रिपोर्टों के अनुसार, इमारत में एक बेसमेंट और ऊपर पांच मंजिलें थीं. इसका इस्तेमाल पीजी के तौर पर हो रहा था और इसे ‘Hostel Daze’ के नाम से भी बताया गया है.
कितने लोगों की मौत और कितने घायल?
सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद कल शाम से आज दोपहर तक मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग अपडेट सामने आते रहे. 7 सितंबर 2026 की दोपहर उपलब्ध नवीनतम जानकारी के मुताबिक, हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर कम से कम 7 हो गई है. मलबे से निकाले गए एक और व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने के बाद मृतकों की संख्या बढ़ी.
राहत और बचाव दल अब तक मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाल चुके हैं. इनमें से 10 घायलों को एम्स ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया था. अस्पताल में 6 लोगों को मृत अवस्था में लाया गया, जबकि एक अन्य गंभीर रूप से घायल व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. फिलहाल, हादसे में घायल अन्य लोगों का इलाज जारी है.
मलबे में कितने लोग फंसे?
हादसे के तुरंत बाद यह स्पष्ट नहीं था कि इमारत के अंदर कुल कितने लोग मौजूद थे. स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका जताई. कुछ रिपोर्टों में 15 से 20 और कुछ में 20 से 30 लोगों के मलबे में दबे होने की बात कही गई, लेकिन प्रशासन ने इतनी बड़ी संख्या की तत्काल आधिकारिक पुष्टि नहीं की थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने मलबे के अंदर से लोगों के मदद के लिए पुकारने की बात भी बताई. इससे बचाव दल ने अभियान और तेज कर दिया.
कैसे चल रहा है रेस्क्यू ऑपरेशन?
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, एनडीआरएफ और अन्य आपदा राहत एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं. मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों के साथ विशेष खोज व बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है. एनडीआरएफ की टीमों ने खोजी कुत्तों और तकनीकी उपकरणों की मदद से दबे लोगों का पता लगाने का काम किया.
स्थानीय लोग भी शुरुआती बचाव अभियान में जुट गए थे. हालांकि प्रशासन ने लोगों से घटनास्थल से दूर रहने की अपील की, ताकि बचाव दल और एंबुलेंस को काम करने में परेशानी न हो.
हादसे की वजह क्या सामने आई?
फिलहाल इमारत गिरने की अंतिम वजह स्पष्ट नहीं हुई है. अधिकारियों के मुताबिक हादसे के वक्त बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था. पुलिस की शुरुआती जानकारी के अनुसार, इमारत काफी पुरानी थी. इसलिए निर्माण/मरम्मत कार्य और इमारत की संरचनात्मक स्थिति समेत विभिन्न पहलुओं की जांच की जा रही है.
सरकार ने क्या कदम उठाए?
दिल्ली सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने संबंधित एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ राहत और बचाव कार्य जारी रखने के निर्देश दिए. एहतियात के तौर पर पास की एक इमारत को भी खाली कराया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की.
अभी सबसे बड़ा फोकस क्या है?
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों का पता लगाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकालना है. मृतकों और घायलों की संख्या में आगे बदलाव संभव है, क्योंकि बचाव अभियान जारी है और इमारत के अंदर मौजूद लोगों की वास्तविक संख्या का पूरा आंकड़ा अभी सामने नहीं आया है.
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