Homeबिजनेसभारत की मेट्रो रफ्तार ने दुनिया को चौंकाया! अमेरिका को पछाड़ने की...

भारत की मेट्रो रफ्तार ने दुनिया को चौंकाया! अमेरिका को पछाड़ने की ओर बढ़ रहा देश

India Metro Network: भारत में मेट्रो रेल की कहानी महज तेज सफर की नहीं, बल्कि बदलते शहरी भारत की तस्वीर भी है. वर्ष 1984 में देश में मेट्रो सेवा की शुरुआत हुई थी. चार दशक से ज्यादा समय बाद भारत का मेट्रो नेटवर्क देश के बड़े शहरों की लाइफलाइन बन चुका है. अब इसकी रफ्तार इतनी तेज हो गई है कि भारत दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मेट्रो नेटवर्क वाला देश बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.

1984 से शुरू हुआ सफर, अब 1000 किमी के पार
भारत में मेट्रो की शुरुआत कोलकाता से हुई थी. इसके बाद दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई, चेन्नई, हैदराबाद, जयपुर, लखनऊ समेत कई शहरों में मेट्रो नेटवर्क का विस्तार हुआ. केंद्र सरकार के मार्च 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत का परिचालन मेट्रो नेटवर्क 2014 के 248 किलोमीटर से बढ़कर 2025 में करीब 1,095 किलोमीटर हो गया. इसी अवधि में मेट्रो की पहुंच 5 शहरों से बढ़कर 26 शहरों तक पहुंची.

फरवरी 2026 में संसद में दिए गए सरकारी जवाब के मुताबिक, दिसंबर 2025 तक मेट्रो और RRTS को मिलाकर करीब 1,096 किलोमीटर नेटवर्क 26 शहरों में परिचालन में था. इसी दौरान औसत दैनिक मेट्रो यात्रियों की संख्या 2013-14 के करीब 28 लाख से बढ़कर 2025-26 में 1.15 करोड़ तक पहुंच गई.

अमेरिका से आगे निकलने की तैयारी
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, भारत का मेट्रो नेटवर्क अब करीब 1,170 किलोमीटर के स्तर तक पहुंच चुका है. 5 सितंबर 2026 को इंदौर मेट्रो के नए 11 किलोमीटर हिस्से के उद्घाटन के दौरान केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत 2014 के करीब 245 किलोमीटर से बढ़कर लगभग 1,170 किलोमीटर तक पहुंच गया है और अगले दो वर्षों में अमेरिका को पीछे छोड़ने की उम्मीद है.

हालांकि, इसे अभी से भारत के दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन जाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उपलब्ध वैश्विक आंकड़ों में चीन सबसे आगे है, जबकि अमेरिका और भारत के बीच नेटवर्क लंबाई का अंतर लगातार घट रहा है. मौजूदा विस्तार जारी रहा तो भारत के अमेरिका को पीछे छोड़कर दूसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है.

नए शहरों में भी बढ़ रही रफ्तार
मेट्रो विस्तार की रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2026 की शुरुआत में इंदौर में करीब 11 किलोमीटर का नया हिस्सा यात्री सेवा के लिए शुरू हुआ. इससे इंदौर का परिचालन नेटवर्क करीब 17 किलोमीटर और 16 स्टेशनों तक पहुंच गया.

वहीं बेंगलुरु में पिंक लाइन के 7.5 किलोमीटर हिस्से को इसी महीने शुरू किए जाने की तैयारी है. इसके चालू होने के बाद शहर का मेट्रो नेटवर्क 100 किलोमीटर से ज्यादा हो जाएगा.

सिर्फ सफर नहीं, बदल रही शहरों की अर्थव्यवस्था
मेट्रो का विस्तार केवल ट्रैफिक कम करने तक सीमित नहीं है. तेज और भरोसेमंद सार्वजनिक परिवहन से रोजगार केंद्रों, बाजारों, रेलवे स्टेशनों और आवासीय इलाकों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होती है. सरकार के मुताबिक, मेट्रो निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने, ईंधन बचाने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करने में भी मदद करती है.

इसलिए अगले कुछ साल भारत के मेट्रो नेटवर्क के लिए निर्णायक हो सकते हैं. अगर निर्माण और नई परियोजनाओं की मौजूदा रफ्तार कायम रही, तो 1984 में शुरू हुई यह यात्रा भारत को दुनिया के ‘मेट्रो किंग’ देशों की सूची में दूसरे पायदान तक पहुंचा सकती है.

यह भी पढ़ें- Fact Check: ISRO के निजीकरण का दावा कितना सच? 9 यूनियनों की चिट्ठी से छिड़ी बहस

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments