Delhi Bulldozer Action: राजधानी दिल्ली में सत्य निकेतन के दर्दनाक बिल्डिंग हादसे के बाद अवैध और असुरक्षित निर्माणों के खिलाफ सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने नगर निगम (MCD) अधिकारियों को राजधानी में अवैध निर्माण की पहचान कर तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं. इसके बाद दिल्ली के कई इलाकों में बुलडोजर एक्शन तेज हो गया है.
सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन मोड में सरकार
दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में 6 सितंबर को एक पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी. इस हादसे ने राजधानी में पुराने, कमजोर और नियमों को ताक पर रखकर बनाए गए भवनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. हादसे के बाद प्रशासन ने आसपास की इमारतों की भी जांच शुरू की.
अब मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरे दिल्ली में अवैध निर्माणों के खिलाफ अभियान तेज करने के निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने MCD के वरिष्ठ अधिकारियों को फील्ड में मौजूद रहने और नियमों का उल्लंघन करने वाले निर्माणों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है.
कई इलाकों में पहुंचा बुलडोजर
MCD की कार्रवाई सिर्फ सत्य निकेतन तक सीमित नहीं है. रिपोर्टों के मुताबिक, राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में अनधिकृत निर्माणों की पहचान कर तोड़फोड़ और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है. सत्य निकेतन इलाके में भी हादसे के बाद पास की एक इमारत को नियंत्रित तरीके से गिराने की कार्रवाई शुरू की गई.
MCD की व्यापक कार्रवाई में अब तक कई संपत्तियों को ध्वस्त और कुछ अवैध निर्माणों को सील किए जाने की जानकारी सामने आई है. प्रशासन का फोकस ऐसे निर्माणों पर है जो बिना अनुमति के खड़े किए गए हैं या जिनमें भवन नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया गया है.
PG और हॉस्टल पर खास नजर
इस पूरे अभियान में PG और हॉस्टल भी प्रशासन के रडार पर हैं. मुख्यमंत्री ने राजधानी में चल रहे PG और हॉस्टल की गहन जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां भवन सुरक्षा और निर्माण संबंधी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं.
खास तौर पर उन इमारतों की जांच की जा रही है जहां अतिरिक्त मंजिलें या अन्य निर्माण बिना जरूरी मंजूरी के किए गए हैं. अधिकारियों को भवन रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने को कहा गया है कि निर्माण कब हुआ और उस समय किस विभाग के अधिकार क्षेत्र में संबंधित संपत्ति आती थी.
लापरवाही पर जिम्मेदारी भी तय होगी
सरकार का रुख सिर्फ अवैध निर्माण गिराने तक सीमित नहीं है. मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया है कि यदि किसी अवैध निर्माण के मामले में अधिकारियों की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए. यानी अब सवाल सिर्फ बिल्डिंग मालिक पर नहीं, बल्कि निगरानी और अनुमति प्रक्रिया में हुई संभावित चूक पर भी उठेगा.
साफ है कि सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया है. आने वाले दिनों में राजधानी के अलग-अलग इलाकों में जांच, सीलिंग और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई और तेज हो सकती है.
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