SC/ST Act: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय कुमार (संजय आजाद) के साथ कथित मारपीट का मामला एक बार फिर चर्चा में है. इस मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को पुलिस ने गिरफ्तार किया है. दिल्ली की अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा था और बाद में मामले में SC/ST एक्ट समेत अन्य कानूनी प्रावधानों को लेकर कार्रवाई आगे बढ़ी. दिल्ली हाईकोर्ट ने भी उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी.
अब इस मामले से जुड़ा एक अलग सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा में है. संजय आजाद के एक हालिया वीडियो बयान में उनके बौद्ध धर्म अपनाने की बात कही गई है. इसके बाद सवाल उठ रहा है कि अगर कोई व्यक्ति हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपना लेता है, तो क्या वह SC की श्रेणी में बना रहता है और उसके साथ हुए अत्याचार के मामले में SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई हो सकती है?
सबसे पहले जानिए क्या है SC/ST एक्ट
SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 का उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के सदस्यों के खिलाफ अत्याचार से जुड़े अपराधों की रोकथाम और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई करना है. कानून में ‘Scheduled Castes and Scheduled Tribes’ की परिभाषा संविधान के अनुच्छेद 366 के संबंधित प्रावधानों से जोड़ी गई है.
इसलिए किसी मामले में SC/ST एक्ट की धाराएं लगने का सवाल केवल इस बात से तय नहीं होता कि पीड़ित व्यक्ति किस धर्म को मानता है. यह भी देखा जाता है कि वह कानूनी तौर पर अनुसूचित जाति की श्रेणी में आता है या नहीं और कथित घटना SC/ST एक्ट की संबंधित धाराओं की शर्तों को पूरा करती है या नहीं.
क्या बौद्ध धर्म अपनाने से SC दर्जा खत्म हो जाता है?
नहीं, सिर्फ बौद्ध धर्म अपनाने से SC दर्जा खत्म नहीं होता. भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के दस्तावेज के अनुसार, 1990 में संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश में संशोधन किया गया. इसके बाद राष्ट्रपति के आदेश में शामिल SC समुदायों के वे सदस्य जो बौद्ध धर्म अपनाते हैं, उन्हें भी अनुसूचित जाति का सदस्य माना जा सकता है. सरकार ने ऐसे लोगों के SC प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं. सरकारी दस्तावेजों में भी हिंदू, सिख और बौद्ध धर्मों से जुड़े पात्र समुदायों के लिए SC मान्यता का प्रावधान दर्ज है.
फिर संजय आजाद के मामले में SC/ST एक्ट क्यों महत्वपूर्ण है?
स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ दर्ज मामले में पुलिस ने बाद में SC/ST एक्ट की धाराएं जोड़ी थीं. रिपोर्टों के अनुसार, शुरुआती FIR में सामान्य आपराधिक धाराएं थीं, लेकिन बाद में SC/ST एक्ट सहित अन्य प्रावधान जोड़े गए. इसलिए केवल यह कहना कि व्यक्ति ने बौद्ध धर्म अपना लिया है, इसलिए SC/ST एक्ट नहीं लग सकता कानूनी तौर पर सही निष्कर्ष नहीं है.
हालांकि, किसी खास मामले में SC/ST एक्ट की कौन-सी धारा लागू होगी, यह घटना के तथ्य, पीड़ित की कानूनी SC स्थिति, आरोपों और जांच के आधार पर तय होता है. अंतिम रूप से अपराध सिद्ध होना अदालत की प्रक्रिया पर निर्भर करता है.
10 सितंबर तक क्या है ताजा स्थिति?
स्वतंत्र भारद्वाज को मामले में गिरफ्तार किया जा चुका है. दिल्ली की अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा और उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली दिल्ली हाईकोर्ट की याचिका भी खारिज हो चुकी है.
इस बीच, सोशल मीडिया पर बौद्ध धर्म और SC/ST एक्ट को लेकर बहस तेज है. लेकिन उपलब्ध सरकारी कानूनी रिकॉर्ड साफ बताते हैं कि पात्र SC समुदाय से बौद्ध धर्म अपनाने पर SC दर्जा स्वतः समाप्त नहीं होता. इसलिए इस मामले में धर्म परिवर्तन को आधार बनाकर SC/ST एक्ट की कार्रवाई को अपने-आप गैरकानूनी बताना सही नहीं होगा.




