Vande Mataram Mandatory in Schools: बिहार में शिक्षा के साथ संस्कारों को जोड़ने की दिशा में एक बड़ा फैसला लिया गया है. राज्य सरकार ने सभी सरकारी स्कूलों में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को अनिवार्य कर दिया है. अब हर सुबह स्कूलों की प्रार्थना सभा इस राष्ट्रगीत के साथ शुरू होगी, जिससे बच्चों में देशभक्ति की भावना को और मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है.
केंद्र के निर्देश के बाद राज्य का कदम
दरअसल, केंद्र सरकार ने 28 जनवरी 2026 को एक अहम आदेश जारी किया था. इस आदेश के अनुसार, देशभर के स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान सप्ताह में कम से कम एक दिन राष्ट्रगीत जरूरी किया गया है. इसके अलावा, राष्ट्रीय पर्व, सरकारी कार्यक्रम और अन्य विशेष अवसरों पर भी ‘वंदे मातरम्’ को शामिल करना अनिवार्य किया गया है. इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए बिहार सरकार ने इसे लागू किया है.
क्या होगा स्कूलों में बदलाव?
नए आदेश के लागू होने के बाद, अब स्कूलों की सुबह की दिनचर्या में बदलाव देखने को मिलेगा. अब छात्र-छात्राएं और शिक्षक एक साथ खड़े होकर पूरे सम्मान के साथ ‘वंदे मातरम्’ गाएंगे. इसके बाद ही अन्य प्रार्थनाएं और गतिविधियां शुरू होंगी. साथ ही, बच्चों को राष्ट्रगीत का इतिहास, उसका महत्व और स्वतंत्रता संग्राम से उसका संबंध भी समझाया जाएगा.
क्यों जरूरी माना गया यह कदम?
शिक्षा विभाग का मानना है कि बच्चों में छोटी उम्र से ही राष्ट्रीय मूल्यों को विकसित करना बेहद जरूरी है. ‘वंदे मातरम्’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि देश की आजादी की लड़ाई और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है. इसे नियमित रूप से गाने से छात्रों में अनुशासन, एकता और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना बढ़ेगी.
लोगों की प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर समाज में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कई लोग इसे सकारात्मक पहल मानते हुए कह रहे हैं कि इससे नई पीढ़ी में देशभक्ति की भावना मजबूत होगी. वहीं, कुछ लोगों का मानना है कि इसे लागू करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि यह केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए.
कुल मिलाकर, केंद्र और राज्य सरकार के इस कदम को शिक्षा के साथ राष्ट्रभावना को जोड़ने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. अब देखना होगा कि इसका प्रभाव बच्चों के व्यवहार और सोच पर किस तरह पड़ता है.
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