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बीमा खरीद रहे हैं? साइबर ठगों के इन 5 खतरनाक पैंतरों से रहें सावधान

Insurance Fraud: बीमा पॉलिसी खरीदने या पुरानी पॉलिसी को रिन्यू कराने के दौरान लोग अक्सर एजेंट, कस्टमर केयर या किसी कंपनी के प्रतिनिधि से फोन पर बात करते हैं. इसी भरोसे का फायदा अब साइबर ठग उठा रहे हैं. फर्जी इंश्योरेंस ऑफर, पॉलिसी अपडेट, KYC और बोनस के नाम पर लोगों से निजी जानकारी और पैसे हासिल करने की कोशिश की जाती है. दिल्ली पुलिस भी फर्जी इंश्योरेंस कॉल को लेकर लोगों को सावधान करती रही है.

1. फर्जी इंश्योरेंस अधिकारी बनकर कॉल
ठग खुद को बीमा कंपनी, एजेंट या नियामक संस्था का अधिकारी बताकर फोन कर सकते हैं. वे पॉलिसी में कोई कमी बताकर तुरंत भुगतान करने या दस्तावेज साझा करने का दबाव बना सकते हैं.

खास तौर पर IRDAI के नाम का इस्तेमाल करके लोगों को भरोसे में लेने की कोशिश की जा सकती है. ध्यान रखें कि किसी अनजान कॉलर के कहने पर बैंकिंग या निजी जानकारी साझा करना जोखिम भरा है. IRDAI ने फर्जी कॉल और ऑफर से सावधान रहने की चेतावनी दी है.

2. KYC अपडेट के नाम पर ठगी
“आपकी पॉलिसी बंद हो जाएगी”, “KYC तुरंत अपडेट करें” या “दस्तावेज जमा नहीं किए तो क्लेम रुक जाएगा”- ऐसे संदेशों से ग्राहक को डराया जा सकता है.

इसके बाद ठग किसी लिंक पर क्लिक करने, ऐप डाउनलोड करने या संवेदनशील जानकारी भरने को कह सकते हैं. हालिया साइबर अपराधों में फर्जी ऐप के जरिए फोन की पहुंच हासिल कर वित्तीय धोखाधड़ी करने के मामले भी सामने आए हैं.

3. पॉलिसी बोनस या ज्यादा रिटर्न का लालच
ठगी का एक पुराना, लेकिन लगातार इस्तेमाल होने वाला तरीका है- मौजूदा पॉलिसी पर बड़ा बोनस या अतिरिक्त रकम दिलाने का दावा. दिल्ली पुलिस ने भी फर्जी इंश्योरेंस कॉल के ऐसे तरीकों का उल्लेख किया है, जिनमें बेहतर रिटर्न या दूसरी पॉलिसी में ट्रांसफर का झांसा दिया जाता है. अगर कोई व्यक्ति बोनस दिलाने के नाम पर पहले “प्रोसेसिंग फीस”, “टैक्स” या दूसरी रकम मांगता है, तो तुरंत सावधान हो जाएं.

4. नकली लिंक और वेबसाइट का जाल
साइबर ठग असली कंपनी जैसी दिखने वाली वेबसाइट, ईमेल या मैसेज तैयार कर सकते हैं. ग्राहक को वहां पॉलिसी खरीदने, प्रीमियम भरने या जानकारी अपडेट करने के लिए कहा जाता है.

ऐसे लिंक पर अपनी बैंकिंग जानकारी, OTP, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील विवरण डालना भारी नुकसान का कारण बन सकता है. इसलिए कंपनी की वेबसाइट या आधिकारिक ऐप खुद खोलकर ही जानकारी जांचना बेहतर है.

5. एजेंट या कस्टमर केयर बनकर डिजिटल ठगी
ठग सोशल मीडिया, मैसेजिंग ऐप या फोन के जरिए खुद को अधिकृत एजेंट या कस्टमर केयर कर्मचारी बता सकते हैं. बातचीत के दौरान वे स्क्रीन शेयर करने, कोई APK फाइल डाउनलोड करने या रिमोट एक्सेस देने के लिए कह सकते हैं.

यह तरीका खास तौर पर खतरनाक है, क्योंकि दुर्भावनापूर्ण ऐप को खतरनाक परमिशन मिलने के बाद फोन और वित्तीय गतिविधियों पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश हो सकती है.

IRDAI का एंटी-फ्रॉड सिस्टम भी हुआ मजबूत
बीमा क्षेत्र में धोखाधड़ी रोकने के लिए IRDAI का नया Insurance Fraud Monitoring Framework 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी है. इसका उद्देश्य बीमा क्षेत्र में धोखाधड़ी की पहचान, रोकथाम, रिपोर्टिंग और उसके खिलाफ कार्रवाई को मजबूत करना है. इसका दायरा बीमा कंपनियों के साथ वितरण चैनलों तक भी बढ़ाया गया है.

ठगी से बचने का आसान तरीका
बीमा खरीदते समय हमेशा कंपनी और एजेंट की आधिकारिक जानकारी सत्यापित करें. अनजान लिंक पर क्लिक न करें और फोन पर OTP, पासवर्ड या बैंकिंग संबंधी गोपनीय जानकारी साझा न करें. किसी ऑफर पर संदेह हो तो संबंधित बीमा कंपनी के आधिकारिक चैनल से खुद संपर्क करें.

अगर साइबर ठगी हो जाए तो 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत करना और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर रिपोर्ट करना महत्वपूर्ण है. देर होने पर रकम वापस पाने की संभावना प्रभावित हो सकती है.

यह भी पढ़ें- “लोन नहीं लिया फिर भी बन गए कर्जदार!” गालियां, धमकियां और बदनामी… देशभर में बढ़ रहे साइबर अपराध

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