Kulgam Terror Attack: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शुक्रवार शाम आतंकियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे दो गैर-स्थानीय मजदूरों पर गोलीबारी कर दी. इस हमले में छत्तीसगढ़ के एक मजदूर की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया. घटना के बाद पूरे इलाके की घेराबंदी कर सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने संयुक्त तलाशी अभियान शुरू कर दिया है. कुछ मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा सूत्रों के हवाले से हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा के फ्रंट द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) पर संदेह जताया गया है. हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी जांच एजेंसी या सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
पीओके में जारी अशांति के बीच बढ़ी सुरक्षा चिंता
इसी बीच, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में चुनाव के बाद हिंसा, विरोध प्रदर्शन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, वहां नागरिक संगठनों और प्रदर्शनकारियों का सरकार के खिलाफ विरोध जारी है, जबकि मानवाधिकार संगठनों ने भी घटनाक्रम पर चिंता जताई है.
पाकिस्तान में आंतरिक संकट से ध्यान भटकाने की कोशिश
राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि जब पाकिस्तान के भीतर राजनीतिक या सुरक्षा संकट गहराता है, तब नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव बढ़ाने या सीमा पार आतंकी नेटवर्क को सक्रिय करने की आशंका भी बढ़ जाती है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि पीओके में जारी विरोध और अस्थिरता से अंतरराष्ट्रीय ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ाने की कोशिश कर सकता है.
हालांकि यह केवल सुरक्षा विशेषज्ञों का विश्लेषण है. अब तक भारत सरकार या किसी आधिकारिक जांच एजेंसी ने कुलगाम हमले को सीधे पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से जोड़ने की पुष्टि नहीं की है.
सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर
कुलगाम हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने दक्षिण कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में तलाशी और निगरानी बढ़ा दी है. प्रवासी मजदूरों के कार्यस्थलों और ठिकानों की सुरक्षा की भी समीक्षा की जा रही है. शुरुआती जांच में हमलावरों की पहचान और उनके नेटवर्क का पता लगाने के लिए कई सुराग जुटाए जा रहे हैं.
घुसपैठ और आतंकी नेटवर्क पर पैनी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशों और आतंकी गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जाएगी. वहीं, कुलगाम हमले की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इसके पीछे कौन-सा आतंकी संगठन या मॉड्यूल सक्रिय था. फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां किसी भी संभावना से इनकार नहीं कर रही हैं, लेकिन जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से भी बच रही हैं. ऐसे में, कश्मीर की सुरक्षा स्थिति और पीओके के घटनाक्रम दोनों पर देश की सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर बनी हुई है.
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