Rajya Sabha Debate: संसद के मानसून सत्र के दौरान छात्र आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा बुधवार को राज्यसभा में जोरदार ढंग से उठा. विपक्ष ने छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों को लेकर सरकार को घेरा, जबकि केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है. इसी दौरान उनका यह बयान भी चर्चा का विषय बन गया कि “अगर एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाएंगे ही.” इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर विपक्ष का हंगामा
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ कठोर व्यवहार स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले पर जवाब देने और कार्रवाई की समीक्षा कराने की मांग की. विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री से भी सदन में बयान देने की मांग की, जिसके कारण सदन की कार्यवाही कई बार बाधित हुई.
नड्डा का जवाब: कानून तोड़ेंगे तो कार्रवाई होगी
विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन यदि कोई प्रदर्शन कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बनता है या निर्धारित नियमों का उल्लंघन करता है तो पुलिस अपना कर्तव्य निभाती है. इसी दौरान उन्होंने कहा कि “एक्टिविस्ट बनेंगे तो जेल जाएंगे ही”, जिसका आशय यह बताया गया कि कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई स्वाभाविक है. उनके इस बयान पर विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और इसे छात्रों का अपमान बताया.
खरगे और नड्डा के बीच तीखी बहस
बहस के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है और लोकतांत्रिक विरोध को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है. इसके जवाब में नड्डा ने कहा कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए मुद्दे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी से सरकार पीछे नहीं हट सकती. दोनों नेताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक हुई, जिसके कारण सदन का माहौल काफी गर्म हो गया.
पुलिस कार्रवाई पर सरकार और विपक्ष आमने-सामने
विपक्ष लगातार इस बात पर जोर देता रहा कि छात्रों पर बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियों ने परिस्थितियों के अनुसार कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई की. सरकार ने यह भी दोहराया कि किसी भी प्रदर्शन को हिंसक या अवैध रूप लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
संसद में जारी रह सकता है गतिरोध
छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई का मुद्दा अब संसद के मानसून सत्र का प्रमुख राजनीतिक विषय बन चुका है. विपक्ष इस पर विस्तृत चर्चा और सरकार की जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सत्ता पक्ष इसे कानून-व्यवस्था का मामला बता रहा है. ऐसे संकेत हैं कि आने वाले दिनों में भी यह मुद्दा संसद के दोनों सदनों में गूंज सकता है और इस पर राजनीतिक टकराव जारी रहने की संभावना है.
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