US Iran Tensions: मध्य-पूर्व में कई दिनों से मंडरा रहा बड़ा युद्ध फिलहाल टलता दिखाई दे रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को अचानक रोक दिया है. लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर ट्रंप का असली गेम प्लान क्या है? क्या यह सिर्फ युद्ध टालने की रणनीति है या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा कूटनीतिक सौदा तैयार हो रहा है? हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत तेज हो गई है. इसी वजह से प्रस्तावित सैन्य हमले को फिलहाल रोक दिया गया.
आखिरी वक्त पर क्यों रुका हमला?
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सीमित सैन्य ऑपरेशन की तैयारी लगभग पूरी कर ली थी. खाड़ी देशों- खासकर कतर, सऊदी अरब और UAE ने अमेरिका से अपील की कि बातचीत को एक मौका दिया जाए. इसके बाद ट्रंप ने हमले को “होल्ड” पर डाल दिया. बताया जा रहा है कि ईरान ने भी नया शांति प्रस्ताव भेजा है.
ट्रंप का असली लक्ष्य क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का मुख्य फोकस सीधे युद्ध से ज्यादा “दबाव बनाकर समझौता” करवाने पर है. अमेरिका की सबसे बड़ी चिंता ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ता तनाव है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि ईरान लंबे समय तक यूरेनियम संवर्धन रोक दे. इसके बदले में कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जा सकती है.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप खुद को “डील मेकर” के रूप में पेश करना चाहते हैं. इसलिए वे युद्ध की धमकी देकर ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश कर रहे हैं.
क्या सिर्फ दबाव की राजनीति हो रही है?
ट्रंप ने भले हमला टाल दिया हो, लेकिन अमेरिकी सैन्य तैयारियां अभी भी जारी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में नौसैनिक गतिविधियां बढ़ाई हैं और जरूरत पड़ने पर “फुल स्केल अटैक” का विकल्प भी खुला रखा गया है.
यानी साफ है कि वॉशिंगटन फिलहाल “डिप्लोमेसी और डर” दोनों का इस्तेमाल कर रहा है. एक तरफ बातचीत जारी है, दूसरी तरफ सैन्य दबाव बनाए रखा गया है, ताकि ईरान ज्यादा रियायत देने को मजबूर हो.
तेल बाजार और दुनिया क्यों चिंतित?
ईरान-अमेरिका तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ रहा है. हमले की आशंका के बीच कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी थीं. हालांकि हमले के टलने की खबर के बाद तेल कीमतों में गिरावट दर्ज की गई.
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइनों में से एक माना जाता है. यदि यहां संघर्ष बढ़ता है, तो भारत समेत कई देशों में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है.
क्या आगे फिर भड़क सकता है युद्ध?
हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. अमेरिकी अधिकारियों ने साफ कहा है कि अगर बातचीत विफल होती है तो सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है. यानी फिलहाल हमला टल जरूर गया है, लेकिन खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. ट्रंप की रणनीति अब “सीधा युद्ध” नहीं, बल्कि “कड़े दबाव के साथ बड़ी डील” हासिल करने की दिखाई दे रही है. आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत तय करेगी कि दुनिया युद्ध की तरफ बढ़ेगी या किसी बड़े समझौते की तरफ.
यह भी पढ़ें- UAE से नॉर्वे तक पीएम मोदी की कूटनीतिक ताकत, ऊर्जा और टेक्नोलॉजी पर बड़े समझौते




