Building Safety Check: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत के ढ़हने से 7 लोगों की मौत और 5 लोगों के घायल होने के बाद राजधानी में PG और हॉस्टल की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं. हादसे के समय इमारत में मरम्मत का काम चल रहा था और अब इसकी संरचनात्मक स्थिति व निर्माण कार्य की जांच की जा रही है.
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने PG हब में इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट की प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है. अधिकारियों को PG हब की इमारतों का ऑडिट एक सप्ताह के भीतर कराने के निर्देश दिए गए हैं.
ऐसे में, अगर आप छात्र हैं या अपने बच्चे के लिए PG तलाश रहे हैं तो सिर्फ किराया, कॉलेज से दूरी और कमरे की सुविधाएं देखकर फैसला न करें. बिल्डिंग की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
1. बिल्डिंग में बड़ी दरारों को नजरअंदाज न करें
कमरे, सीढ़ियों, बालकनी और कॉमन एरिया की दीवारों को ध्यान से देखें. बड़ी, लगातार बढ़ती या तिरछी दरारें चिंता का संकेत हो सकती हैं. खासकर बीम, कॉलम या स्लैब के आसपास दिखाई देने वाली दरारों को सामान्य मानकर नजरअंदाज न करें. सिर्फ पेंट कर देने से दरार की समस्या खत्म नहीं होती. गंभीर स्थिति में स्ट्रक्चरल इंजीनियर की राय लेना बेहतर है.
2. बेसमेंट सबसे महत्वपूर्ण जगहों में से एक
PG देखने जाएं तो केवल अपना कमरा देखकर वापस न लौटें. बिल्डिंग का बेसमेंट भी देखें. वहां पानी जमा होना, लगातार सीलन, नींव के आसपास खुदाई या बड़े स्तर पर निर्माण कार्य चल रहा हो तो अतिरिक्त सावधानी बरतें.
सत्य निकेतन हादसे में भी बेसमेंट में निर्माण/मरम्मत कार्य चलने की बात सामने आई है और इसी वजह से बिल्डिंग की संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं.
3. क्या बिल्डिंग में अनधिकृत निर्माण तो नहीं?
मकान मालिक से पूछें कि बिल्डिंग का स्वीकृत नक्शा उपलब्ध है या नहीं और वर्तमान मंजिलों व निर्माण की स्थिति उससे मेल खाती है या नहीं. बाद में जोड़ी गई अतिरिक्त मंजिल, कमरे या बड़े बदलाव सुरक्षा और कानूनी स्थिति दोनों के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं. विशेषज्ञों ने सत्य निकेतन मामले के संदर्भ में पुराने भवन, अतिरिक्त निर्माण और अनधिकृत मरम्मत जैसे पहलुओं पर भी सवाल उठाए हैं.
4. बहुत पुरानी बिल्डिंग में ज्यादा सतर्क रहें
सिर्फ उम्र देखकर किसी इमारत को असुरक्षित नहीं कहा जा सकता, लेकिन पुरानी इमारत में मेंटेनेंस और स्ट्रक्चरल कंडीशन की जानकारी लेना जरूरी है. पूछें कि आखिरी बार संरचनात्मक जांच या बड़ी मरम्मत कब हुई थी. जरूरत पड़ने पर मकान मालिक से स्ट्रक्चरल सेफ्टी रिपोर्ट मांगना समझदारी है.
5. आग लगने पर बाहर निकलने का रास्ता देखें
PG में रहने से पहले देखें कि सीढ़ियां पर्याप्त और इस्तेमाल योग्य हैं या नहीं, इमरजेंसी एग्जिट मौजूद है या नहीं और रास्ते सामान से तो बंद नहीं हैं. आग लगने की स्थिति में बाहर निकलने का रास्ता स्पष्ट होना बेहद जरूरी है.
जहां लागू हो, फायर सेफ्टी क्लीयरेंस/NOC के बारे में भी जानकारी लें. दिल्ली में PG और अन्य प्रतिष्ठानों के लिए फायर सेफ्टी नियम भवन की प्रकृति और उपयोग के अनुसार लागू होते हैं.
6. बिजली की वायरिंग और ओवरलोडिंग जांचें
एक ही कमरे में कई छात्रों के लिए बहुत सारे पंखे, AC, हीटर, इंडक्शन या अन्य उपकरण चलाए जा रहे हों तो ओवरलोडिंग का खतरा हो सकता है. खुले तार, जले हुए स्विच बोर्ड, ढ़ीले कनेक्शन या बार-बार ट्रिप होने वाले MCB को हल्के में न लें.
7. मालिक से जरूरी दस्तावेज और अनुमति पूछें
PG लेने से पहले मालिक से पूछें कि भवन का इस्तेमाल जिस उद्देश्य के लिए हो रहा है, वह नियमों के अनुरूप है या नहीं. उपलब्ध होने पर स्वीकृत भवन नक्शा, संबंधित अनुमति और सुरक्षा प्रमाणपत्र देखने की मांग करें. ध्यान रखें, केवल मालिक का यह कहना कि “सब वैध है” पर्याप्त प्रमाण नहीं है.
8. शक हो तो सिर्फ सस्ते किराए के लिए समझौता न करें
अगर बिल्डिंग में लगातार सीलन, गंभीर दरारें, झुकी हुई संरचना, असुरक्षित सीढ़ियां, बेसमेंट में पानी या बड़े स्तर पर निर्माण कार्य दिखाई दे रहा है तो केवल कम किराए या कॉलेज के पास होने के कारण वहां रहने का फैसला न करें. जरूरत पड़ने पर स्वतंत्र स्ट्रक्चरल इंजीनियर से निरीक्षण कराना सबसे सुरक्षित विकल्प हो सकता है.
PG चुनते समय याद रखें ये बात
सत्य निकेतन हादसे के बाद PG सुरक्षा अब केवल छात्रों और अभिभावकों की चिंता नहीं रही, बल्कि प्रशासन के लिए भी बड़ा मुद्दा बन गई है. दिल्ली में PG को अधिक व्यवस्थित करने के लिए लाइसेंसिंग, सुरक्षा और निरीक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर भी काम चल रहा है.
PG चुनते समय सिर्फ लोकेशन और किराए पर ध्यान न दें, सबसे पहले बिल्डिंग की सुरक्षा जांचें. सुरक्षित कमरा भले थोड़ा महंगा पड़े, लेकिन कमजोर इमारत में लिया गया सस्ता कमरा कभी बड़ा खतरा बन सकता है.
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