Respiratory Syncytial Virus: सर्दी-जुकाम, खांसी और हल्के बुखार जैसे सामान्य लक्षणों के कारण कई बार जिस बीमारी को मामूली समझ लिया जाता है, वही कुछ छोटे बच्चों के लिए गंभीर रूप ले सकती है. इसका एक प्रमुख कारण रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस यानी RSV है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, RSV बच्चों में गंभीर निचले श्वसन तंत्र के संक्रमण और अस्पताल में भर्ती होने की प्रमुख वजहों में शामिल है. हालांकि, 10 सितंबर 2026 तक WHO के ताजा वैश्विक निगरानी अपडेट में RSV की गतिविधि दुनिया भर में कम बनी हुई बताई गई है.
सामान्य सर्दी-जुकाम से अलग क्यों है RSV?
RSV एक सामान्य श्वसन वायरस है, जो नाक से लेकर फेफड़ों तक श्वसन तंत्र को प्रभावित कर सकता है. शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे ही हो सकते हैं- नाक बहना, गले में खराश, खांसी, थकान और बुखार. लेकिन कुछ बच्चों में संक्रमण आगे बढ़कर सांस लेने में परेशानी, तेज सांस, घरघराहट और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकता है.
WHO के अनुसार, खासतौर पर छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में गंभीर RSV बीमारी का जोखिम अधिक रहता है. समय से पहले जन्मे बच्चों व हृदय या फेफड़ों से जुड़ी बीमारी वाले बच्चों में भी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ सकता है.
हर साल लाखों बच्चों पर पड़ता है असर
WHO के उपलब्ध वैश्विक अनुमानों के मुताबिक, हर साल पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में RSV संक्रमण के कारण करीब 36 लाख बच्चे अस्पताल में भर्ती होते हैं. वहीं, इस वायरस से लगभग 1 लाख बच्चों की मौत होती है. इनमें से करीब 97 प्रतिशत मौतें निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होती हैं. लगभग आधी RSV मौतें छह महीने से कम उम्र के शिशुओं में होती हैं.
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि RSV से संक्रमित हर बच्चा गंभीर रूप से बीमार होगा. WHO के अनुसार, अधिकांश संक्रमण हल्के होते हैं और स्वस्थ बच्चों में बीमारी अपने आप ठीक हो सकती है.
9 सितंबर को WHO ने उठाया अहम कदम
RSV को लेकर 9 सितंबर 2026 को WHO ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की. संगठन ने मातृ RSV वैक्सीन RSVpreF (ABRYSVO) के मल्टी-डोज वायल को प्रीक्वालिफाई किया है. WHO के मुताबिक, इससे खासतौर पर उन देशों में वैक्सीन को अधिक किफायती और आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है, जहां Gavi के सहयोग से कार्यक्रम चलाए जाने हैं.
इसका उद्देश्य गर्भावस्था के दौरान मां को टीका देकर नवजात और छोटे शिशु को शुरुआती महीनों में RSV से होने वाली गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करना है. WHO ने पहले ही शिशुओं की सुरक्षा के लिए मातृ टीकाकरण और लंबे समय तक प्रभावी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसे विकल्पों की सिफारिश की है.
किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें?
अगर बच्चे को सामान्य जुकाम के साथ सांस लेने में परेशानी, बहुत तेज सांस, लगातार घरघराहट, दूध या खाना लेने में कठिनाई, अत्यधिक सुस्ती या ऑक्सीजन की कमी जैसे संकेत दिखाई दें, तो इसे केवल सामान्य सर्दी-जुकाम मानकर इंतजार नहीं करना चाहिए. गंभीर RSV संक्रमण में ऑक्सीजन का स्तर गिर सकता है और अस्पताल में उपचार की जरूरत पड़ सकती है.
अभी घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन सावधानी जरूरी
WHO के 9 सितंबर 2026 के वैश्विक श्वसन वायरस अपडेट में RSV की वैश्विक पॉजिटिविटी कम बताई गई है. इसलिए मौजूदा स्थिति को किसी वैश्विक RSV प्रकोप के तौर पर पेश करना सही नहीं होगा. फिर भी छोटे बच्चों, खासकर शिशुओं में RSV की गंभीरता को देखते हुए इसके लक्षणों को समझना और जरूरत पड़ने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद महत्वपूर्ण है.
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