Ardha Chakrasan Benefits: लंबे समय तक मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल, घंटों बैठकर काम करना और गलत पोश्चर के कारण गर्दन, कंधे और कमर में दर्द की शिकायत बढ़ सकती है. ऐसे में नियमित योगाभ्यास शरीर की गतिशीलता और मांसपेशियों को सक्रिय बनाए रखने में मदद कर सकता है. अर्धचक्रासन भी ऐसा ही एक योगासन है, जिसे पीठ और रीढ़ से जुड़ी मांसपेशियों के लिए उपयोगी माना जाता है. हालांकि, इसे किसी बीमारी का पक्का इलाज नहीं समझना चाहिए.
क्या है अर्धचक्रासन?
अर्धचक्रासन एक खड़े होकर किया जाने वाला योगासन है, जिसमें शरीर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाया जाता है. इस दौरान कमर, छाती और कंधों के आसपास खिंचाव महसूस हो सकता है. आयुष मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह आसन पीठ, कंधों और रीढ़ के आसपास की मांसपेशियों को सक्रिय रखने व शरीर की लचक बनाए रखने में सहायक हो सकता है.
अर्धचक्रासन से क्या फायदे मिल सकते हैं?
सही तकनीक और नियमित अभ्यास के साथ अर्धचक्रासन पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने और शरीर के पोश्चर पर काम करने में मदद कर सकता है. लंबे समय तक बैठने वाले लोगों को इससे शरीर में खिंचाव और सक्रियता का अनुभव हो सकता है.
हालांकि, कमर दर्द और सर्वाइकल की समस्या के कई कारण हो सकते हैं. इसलिए केवल अर्धचक्रासन करने से हर व्यक्ति को दर्द से राहत मिलेगी, ऐसा दावा नहीं किया जा सकता. गर्दन या कमर में पहले से दर्द होने पर विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है.
कैसे करें अर्धचक्रासन?
सबसे पहले सीधे खड़े हो जाएं और पैरों के बीच सामान्य दूरी रखें.
दोनों हाथों को कमर के पीछे रखें.
धीरे-धीरे सांस लेते हुए छाती को ऊपर उठाएं और शरीर को हल्का पीछे झुकाएं.
गर्दन पर दबाव न डालें और संतुलन बनाए रखें.
कुछ सेकंड बाद धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लौट आएं.
शुरुआती लोगों को प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की देखरेख में अभ्यास करना चाहिए. शरीर को जबरदस्ती पीछे न झुकाएं.
इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी
जिन लोगों को चक्कर आने, संतुलन बिगड़ने या चलते समय लड़खड़ाने की समस्या होती है, उन्हें यह आसन करने से बचना चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर वाले लोगों को भी पीछे झुकने वाले आसन का अभ्यास डॉक्टर की सलाह के बाद ही करना चाहिए. अभ्यास के दौरान दर्द, चक्कर या किसी भी तरह की असहजता महसूस हो तो तुरंत रुक जाएं.
जरूरी सलाह
अर्धचक्रासन को हल्की शारीरिक गतिविधि, सही पोश्चर और नियमित ब्रेक के साथ योग दिनचर्या में शामिल किया जा सकता है. लेकिन लगातार कमर दर्द, हाथ-पैर में सुन्नपन, कमजोरी या तेज गर्दन दर्द होने पर योग के भरोसे न रहें और चिकित्सकीय जांच कराएं.
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