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जिसे कहते थे ‘नॉटी बॉय’, उसी ने कर दिया कमाल! ISRO ने रचा अंतरिक्ष में नया इतिहास

ISRO EOS-05 Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 4 सितंबर 2026 को अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की. श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से GSLV-F17 रॉकेट ने EOS-05 अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष की ओर रवाना किया. इस मिशन की खासियत सिर्फ उपग्रह नहीं, बल्कि वह रॉकेट भी है जिसे लंबे समय से उसके पुराने अस्थिर रिकॉर्ड के कारण ‘नॉटी बॉय’ कहा जाता रहा है.

‘नॉटी बॉय’ ने बदली अपनी कहानी
GSLV की शुरुआती उड़ानों में कुछ असफलताओं के कारण इसे ‘नॉटी बॉय’ का उपनाम मिला था. लेकिन समय के साथ रॉकेट की तकनीक में महत्वपूर्ण सुधार किए गए. EOS-05 मिशन की सफलता इस लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसने GSLV की विश्वसनीयता को एक बार फिर मजबूती दी है.

यह सफलता ISRO के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि जनवरी 2026 के PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के बाद यह 2026 में संगठन का अगला प्रमुख प्रक्षेपण है. ISRO की आधिकारिक लॉन्च सूची में GSLV-F17/EOS-05 को 4 सितंबर 2026 के मिशन के रूप में दर्ज किया गया है.

EOS-05 क्यों है खास?
EOS-05 भारत का समर्पित अर्थ-इमेजिंग उपग्रह है, जिसे जियोसिंक्रोनस कक्षा में काम करने के लिए तैयार किया गया है. करीब 2,367 किलोग्राम वजनी यह उपग्रह लगभग 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी के एक बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी करने की क्षमता विकसित करेगा.

लो-अर्थ ऑर्बिट में घूमने वाले कई पृथ्वी अवलोकन उपग्रह किसी क्षेत्र की तस्वीरें अलग-अलग समय पर लेते हैं. इसके विपरीत जियोसिंक्रोनस कक्षा में EOS-05 किसी खास क्षेत्र पर लंबे समय तक नजर बनाए रखने में मदद करेगा. यही क्षमता इसे भारत की अंतरिक्ष आधारित निगरानी व्यवस्था में महत्वपूर्ण बनाती है.

मौसम से लेकर आपदा प्रबंधन तक फायदा
EOS-05 से मिलने वाली उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और डेटा केवल रणनीतिक जरूरतों तक सीमित नहीं होंगे. पृथ्वी अवलोकन से जुड़े ऐसे उपग्रह कृषि, आपदा प्रबंधन, पर्यावरण निगरानी और प्राकृतिक संसाधनों के आकलन जैसे क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित हो सकते हैं.

रणनीतिक दृष्टि से भी जियोसिंक्रोनस इमेजिंग क्षमता भारत के लिए महत्वपूर्ण है. लगातार निगरानी की क्षमता से संवेदनशील क्षेत्रों और सीमाओं पर होने वाली गतिविधियों की बेहतर तस्वीर हासिल करने में मदद मिल सकती है.

ISRO के लिए ‘कमबैक’ की बड़ी सफलता
EOS-05 मिशन की सफलता को ISRO के लिए एक अहम कमबैक के तौर पर देखा जा रहा है. लंबे अंतराल के बाद हुए इस प्रक्षेपण ने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम में नई गति का संकेत दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मिशन की सफलता पर ISRO को बधाई देते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया है.

‘नॉटी बॉय’ कहे जाने वाले GSLV-F17 की सफल उड़ान ने यह साबित कर दिया कि पुरानी असफलताओं की छाया के बावजूद तकनीकी सुधार और लगातार परीक्षण किसी भी रॉकेट को ज्यादा भरोसेमंद बना सकते हैं. EOS-05 के साथ भारत को अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लगातार नजर रखने की दिशा में एक नई क्षमता मिली है.

यह भी पढ़ें- चंद्रमा पर भारत की नई उड़ान! NASA के Moon Base मिशन में ISRO को मिला साझेदारी का निमंत्रण

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