Homeहेल्थ एंड फिटनेसWHO की चेतावनी: सिर्फ इंसान नहीं, जानवरों और प्रकृति का स्वस्थ रहना...

WHO की चेतावनी: सिर्फ इंसान नहीं, जानवरों और प्रकृति का स्वस्थ रहना भी है जरूरी

WHO One Health Concept: दुनियाभर में स्वास्थ्य को लेकर अब सोच बदल रही है. पहले स्वास्थ्य की चर्चा होती थी तो सबसे ज्यादा ध्यान इंसानों की बीमारियों और उनके इलाज पर दिया जाता था, लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का मानना है कि अच्छी सेहत के लिए केवल इंसानों का स्वस्थ रहना काफी नहीं है. जानवरों, पेड़-पौधों और हमारे आसपास के पर्यावरण का स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है. इसी सोच को आगे बढ़ाने के लिए WHO ‘वन हेल्थ’ (One Health) की अवधारणा पर जोर दे रहा है.

WHO की जानकारियों के अनुसार, इंसान, जानवर और प्रकृति एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. इनमें से किसी एक का स्वास्थ्य बिगड़ने पर दूसरे भी प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में, बीमारियों को रोकने और भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी बड़े खतरों से बचने के लिए सभी क्षेत्रों को मिलकर काम करना होगा.

क्या है WHO की वन हेल्थ (One Health) की अवधारणा?
वन हेल्थ एक ऐसी सोच है, जिसमें इंसानों, जानवरों, पौधों और पर्यावरण के स्वास्थ्य को अलग-अलग नहीं, बल्कि एक साथ देखा जाता है. इसका उद्देश्य इन सभी के बीच संतुलन बनाए रखना है.

उदाहरण के लिए, अगर जंगलों की कटाई होती है और जंगली जानवरों का प्राकृतिक आवास खत्म होता है तो इंसानों और जानवरों के बीच संपर्क बढ़ सकता है. इससे कुछ संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है. इसी तरह प्रदूषित पानी और दूषित भोजन भी इंसानों व जानवरों की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

जानवरों से फैलने वाली बीमारियों पर भी चिंता
WHO के अनुसार, दुनिया में सामने आने वाली 60 प्रतिशत से अधिक नई संक्रामक बीमारियां जानवरों से जुड़ी होती हैं. रेबीज, बर्ड फ्लू और इबोला जैसी बीमारियां इंसानों और जानवरों के स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझाती हैं.

इसके अलावा, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) भी एक बड़ी चुनौती है. यह ऐसी स्थिति है, जब बैक्टीरिया और दूसरे सूक्ष्मजीव दवाओं के असर को बेअसर करने लगते हैं. इसके पीछे इंसानों और पशुओं में एंटीबायोटिक दवाओं का गलत या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल भी एक कारण हो सकता है.

2026 में WHO ने उठाए कौन से अहम कदम?
WHO ने 22 सितंबर 2026 को वन हेल्थ को जमीन पर लागू करने और इसमें निवेश बढ़ाने पर जोर दिया. यह चर्चा पुर्तगाल के लिस्बन में 4 से 7 सितंबर तक आयोजित 9वें वर्ल्ड वन हेल्थ कांग्रेस के बाद सामने आई. इसमें 1300 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया.

वहीं, WHO, संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO), संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) और विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) ने वन हेल्थ ज्वाइंट प्लान ऑफ एक्शन को 2029 तक बढ़ाने पर सहमति जताई है. इसका मकसद देशों को इंसानों, जानवरों और पर्यावरण से जुड़े स्वास्थ्य खतरों से मिलकर निपटने में मदद करना है.

आम लोग भी कैसे निभा सकते हैं अपनी जिम्मेदारी?
वन हेल्थ को सफल बनाने में केवल सरकारों और स्वास्थ्य संगठनों की ही भूमिका नहीं है. आम लोग भी अपनी छोटी-छोटी आदतों से इसमें योगदान दे सकते हैं. इसके लिए जरूरी है कि आसपास सफाई रखें, पानी को दूषित होने से बचाएं, जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार करें और प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें.

इसके अलावा, पालतू जानवरों का समय पर टीकाकरण कराना, बीमार जानवरों से सावधानी बरतना और बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं नहीं लेना भी जरूरी है.

WHO का संदेश साफ है कि इंसानों की सेहत को प्रकृति और जानवरों से अलग करके नहीं देखा जा सकता. अगर हमें आने वाली पीढ़ियों को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य देना है तो इंसान, जानवर और पर्यावरण तीनों की सेहत का ध्यान रखना होगा. इसके लिए जरूरी है कि हम विकास के साथ-साथ प्रकृति के संतुलन और जीव-जंतुओं की सुरक्षा को भी अपनी प्राथमिकता बनाएं, क्योंकि स्वस्थ पर्यावरण ही स्वस्थ समाज की मजबूत नींव है.

यह भी पढ़ें- कमर दर्द और सर्वाइकल की छुट्टी करेगा यह योगासन! जानें अर्धचक्रासन के फायदे

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments