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ममता गुट हो या दूसरा खेमा, कोई नहीं इस्तेमाल कर सकेगा TMC का नाम-सिंबल; EC का आदेश

TMC Name Symbol Dispute 2026: पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संगठनात्मक विवाद के बीच चुनाव आयोग ने बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है. आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को फिलहाल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के आरक्षित ‘फूल व घास’ चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है. यह व्यवस्था आगामी विधानसभा उपचुनावों को देखते हुए लागू की गई है.

आखिर क्या है पूरा मामला?
चुनाव आयोग के सामने पार्टी के संगठन और नियंत्रण को लेकर दो अलग-अलग दावे पहुंचे हैं. आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में कहा कि उसके सामने फिलहाल दो प्रतिद्वंद्वी समूह हैं- एक ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला और दूसरा अरूप रॉय के नेतृत्व वाला. दोनों ही खुद को पार्टी का प्रतिनिधि बता रहे हैं.

विवाद की जड़ पार्टी की राष्ट्रीय कार्यसमिति और उसके संगठनात्मक अधिकारों से जुड़ी है. ऋतब्रत बनर्जी के पक्ष ने राष्ट्रीय कार्यसमिति के कार्यकाल को लेकर सवाल उठाए और 22 जून को एक विशेष सत्र के जरिए अरूप रॉय को राष्ट्रीय कार्यसमिति का अध्यक्ष चुने जाने का दावा किया. ममता बनर्जी गुट ने इस प्रक्रिया और दावे को स्वीकार नहीं किया. दोनों पक्षों ने आयोग के सामने अपने दस्तावेज और दलीलें रखीं.

दोनों गुटों से मांगे गए नए नाम और चुनाव चिह्न
आयोग ने दोनों पक्षों को 18 सितंबर सुबह 11 बजे तक तीन-तीन नाम और तीन-तीन मुक्त चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में देने को कहा था. आयोग इनमें से नाम और चिह्न आवंटित करेगा. दोनों गुट चाहें तो अपने प्रस्तावित नाम में मूल पार्टी से संबंध का संकेत भी रख सकते हैं.

18 सितंबर की सुबह तक सामने आई जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी गुट ने आयोग को अपने पसंदीदा तीन नाम और तीन चुनाव चिह्न सौंप दिए हैं. दूसरे गुट की ओर से भी समय सीमा के भीतर विकल्प देने की प्रक्रिया चल रही थी.

‘फूल व घास’ चिह्न क्यों महत्वपूर्ण है?
‘फूल व घास’ तृणमूल कांग्रेस का आरक्षित चुनाव चिह्न है. आयोग के अंतरिम आदेश के बाद आगामी उपचुनाव में दोनों पक्ष इस चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे. इसका सीधा मतलब है कि मतपत्र या ईवीएम पर दोनों गुटों के उम्मीदवारों को अलग-अलग नाम और अलग-अलग चुनाव चिह्न के साथ पहचान दी जाएगी.

नंदीग्राम और रेजीनगर में होने हैं उपचुनाव
यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को उपचुनाव होना है. दोनों पक्षों की ओर से उम्मीदवारों ने TMC के नाम और चिह्न के दावे के साथ नामांकन किया था. ऐसे में, चुनाव प्रक्रिया में एक ही पार्टी की पहचान को लेकर पैदा हुई स्थिति को स्पष्ट करना आयोग के लिए जरूरी था.

क्या चुनाव आयोग ने तय कर दिया कि असली TMC कौन है?
यह सबसे महत्वपूर्ण बात है. आयोग का मौजूदा आदेश अंतिम फैसला नहीं है. आयोग ने Symbols Order, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत दोनों पक्षों के दावों पर विस्तृत फैसला बाद में करने की बात कही है. आयोग के अनुसार, उपचुनाव नजदीक होने के कारण पूरी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय नहीं था, इसलिए फिलहाल दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान देने की अंतरिम व्यवस्था की गई है.

आगे क्या होगा?
अब उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को आयोग द्वारा मंजूर अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न मिलेंगे. इसके बाद आयोग दोनों पक्षों के संगठनात्मक दस्तावेज, पार्टी संविधान, पदाधिकारियों से जुड़े दावे और अन्य सामग्री की जांच करते हुए पैराग्राफ 15 के तहत मूल विवाद पर अंतिम निर्णय करेगा. इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पार्टी का नाम या आरक्षित चुनाव चिह्न स्थायी रूप से किसी एक गुट को मिल गया है.

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